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Poetry
प्रार्थना
By Asha Jaisinghani विनती सुन लो सरस्वती मां हमे बना दो ज्ञानी तुम हम आयें शरण तुम्हारी मां विनती सुन लो ….. हम बच्चे हैं कच्चे घड़े तुम जैसा चाहो वैसे बने हम जगमें रोशन नाम करे हम इतनी दे दो शक्ति मां विनती सुन लो ……… मिट जाये मन के अंधियारे जब हो ज्ञान का उजियारा मन चंचल है बहुत हमारा तुम अपनी दया दिखाना मां विनती……… पहुंच ही जायें मंजिल को By Asha Jaisinghani
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Dec 11, 20251 min read
बचपन मेरा
By Asha Jaisinghani आओ सुनाऊं एक कहानी बचपन मेरा सीप का मोती जैसे कोई परियों की कहानी आओ सुनाऊं ……… खेलेंगें हम कूदेंगे सारा दिन बस नाचेंगे कोई इनको (माता पिता)समझादो ये दिन फिर ना आयेंगे आओ सुनाऊं ……… हम हंसते हैं हंसते हो हम रोते हैं रोते हो हम प्यार तुम्हारा समझते हैं पर तुम इसका ,बुरा ना मानो जो करले थोड़ी नादानी आओ सुनाऊं ……. गिर गिर कर उठ जायेंगें देखना आगे जायेंगें फितरत अपनी बुरी नहीं हम जीतके दुनिया , दम लेंगे आओ सुनाऊं एक कहानी बचपन मेरा सीप का मोती जैसे कोई
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Dec 11, 20251 min read
पिता
By Asha Jaisinghani पिता तुम पिता हो पिता ही रहना कभी मां नहीं बनना पिता तुम पिता ही रहना तुम्ही हो जिसने परिवार के लिए खीची लक्ष्मण रेखा वरना मां का सह हिरदय तो हर सीमा लांघने की इजाज़त दे देता है पिता तुम पिता हो पिता ही रहना हर छोटी बड़ी बात पर मां के कंधों पर रोना अक्सर कमज़ोर बना देता है पिता तुम पिता हो पिता ही रहना रंग हो चाहे खिले - खिले या हो काले पीले तुममें हुनर है नई तस्वीर उकेरने की पिता तुम पिता हो पिता ही रहना तुम न होते तो पत्ता - पत्ता बिखर जाता तुम प
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Dec 11, 20251 min read
लौट कर ना आना
By Harigandha Singh कि अब जाओ तो लौट कर ना आना, दिल बहलाने का ज़रिया मुझे ना बनाना। महका देना किसी का आँगन हल्की बौछार बनके, कोई आग का दरिया सीने में मेरे ना बहाना। बनना वजह मुस्कुराहटों की किसी के लबों पर, यूँ मज़बूरियों का हवाला देकर, मख़ौल मेरे आँसुओं का ना बनाना। करना वादे पूरे सभी किसी से किए हुए, कसमें तोड़ने के लिए आँखें मेरे सिर पर ना टिकाना। देना साथ हक़ीक़त में हमेशा किसी का, यूँ सपनों में सताने करीब मेरे ना आना। रहो सिर ऊँचा करके ज़िंदगी में हमेशा, कहीं गलती से मैं
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Dec 11, 20251 min read
अब हम मिलते नहीं हैं....
By Disha Thakur हाँ…..अब हम मिलते नहीं हैं, पर ये हवा जो मेरे गालों को सहलाकर, और बालों को इतने प्यार से उलझाकर गुज़री है उसने उसे भी तो छुआ होगा। ये बारिश जो मुझको भीगा कर गई है इसने उसे भी तो भिगोया होगा। ये चाँद जो मुझे यहाँ से इतना खूबसूरत लग रहा है, उसने इसकी तारीफ मे दो लफ्ज तो जरूर कहा होगा। ये जो हमारी यादों की गलियाँ से मैं हर रोज़ गुज़रती हूँ चलो...रोज़ ना सही, पर वो कभी तो गुज़रता होगा। में जब भी जाती हूँ वहाँ उसकी खूशबू पाती हूँ उसकी गली के लोग कहते हैं की व
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Dec 11, 20251 min read
The Canvas of Axioms and Logic
By Joel Vasanth On a warm day, I hear the birds chirping I hear the might of the ocean waves I smell the sweet roses and jasmines and feel the soft grass At night, I hear the crickets' poetry I see the tiny stars and the moon When it rains, I feel the drops on my skin I watch lightning in awe and shriek at thunder I observe ants marching along I see the wasp making its nest And in all these, I observe mathematical structure A structure so profound and yet so difficult to fath
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Dec 11, 20253 min read
तुझे देखता ही रहूँ
By Sudarshan Hon तुझे देखता ही रहूँ तुझे ताकता ही रहूँ तुझे चाहता ही रहूँ.....हरपल।। मैने तुझे देखा मेरा दिल ये खो गया। मैने तुझे चाहा मैं तेरा हो गया।। तुझे भुलू ना मैं कभी याद करता रहूँ......हरपल।। ऐ खुदा शुक्रिया मुझे तुझसे मिलाया। पलकों पे बिठाके मैने दर्द को भूलाया।। मेरे होंठो से हरदम पुकारता ही रहूँ.....हरपल।। By Sudarshan Hon
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Dec 11, 20251 min read
Virat Kohli
By Sudarshan Hon कभी दिखता तुझमें कपिल कभी लगता तू सचिन। रन तो ऐसे बरसते है जैसे तू ही रन मशीन।। क्या तेरा pull क्या तेरा hook। कभी खत्म नही होती रनों की तेरी भूक।। तू क्रिकेट का king और अनुष्का तेरी queen You are the best player I have ever seen.. मैदान जानता है तेरे बल्लेसे निकला बॉल ना कभी अडा है। बॉलर काँपते है यार आगे उनका बाप जो खडा है।। क्रिकेट विश्व में तू तिरंगा जरुर लहराएगा। शायद ही ऐसा player भारत भविष्य में पायेगा।। लगता है तेरे जैसा Awesome look मैं पाऊँ। दिल की
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Dec 11, 20251 min read
क्यों सोचता तेरा मन
By Sudarshan Hon क्यों सोचता तेरा मन जिंदगी से हारा है तू। अमावस को भी उजाला करे वो आसमाँ का तारा है तू।। मुसीबतों से डरकर तू मत माँग सुख की भीख। कदम कदम पर मेरे यार गलतीयों से बस तू सीख।। पता है मुझे तेरे संकट होंगे बहोत गहरे। लेकिन वो मुसाफिर है तू जो चीर दे सागर की लहरे।। काम ऐसे कर जिंदगी में मुसीबते भी तुझे दूर भगाये। खुद पर रख विश्वास इतना कि मंजीले भी तुझे गले लगाए।। जब भी तू गम में होगा सोचना कितनों का है तू प्यारा। क्योंकि कोयले की खान में छिपा हुआ तू ही है वो हीरा।।
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Dec 11, 20251 min read
एक कहानी ऐसी भी
By Sudarshan Hon वीर जवानों की एक गाथा हमने भी सूनी थी । कश्मीर के कारगिल की १९९९ की वो कहानी थी।। दूश्मन सेना हमला करने Border पार आनी थी। कारगिल की जमीन उन्हे उनके मुल्क में लानी थी।। हमारे सैनिकों को बस देश की शान बचानी थी। इसलिए उन्होंने आज हार न मानने की ठानी थी।। उनके लिए शत्रूसेना चाय कम पानी थी। क्योंकि देशप्रेम की सीमा आज आसमानी थी ।। युद्ध हुआ तो दूश्मनों की बहोत हुई हानी थी। भारतीयों का शौर्य देख उन्होने हार मानी थी।। खुदा भी गवाह था ऐसी लाजवाब मर्दानी थी। कश्मिर क
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Dec 11, 20251 min read
यादों का एक खत
By Sudarshan Hon यादों का एक खत समय दे जाता है मुझे। उस खत की पंक्तियों में घर याद आता है मुझे।। वो माँ के हाथ की सब्जी और घी से लिपटी रोटीयाँ। बहना के लंबे लंबे बाल और उनकी बँधी दो चोटीयाँ।। आज भी उस लोरी का स्वर प्यार से सहलाता है मुझे। उस खत की पंक्तियों में घर याद आता है मुझे।। वो घना सा नीम का पेड जिसपर हम झूला झूलते थे। वो आँगन के फूल गुलाब सुबह रंगीन किये खिलते थे।। धूप में आया कूल्फीवाला आज भी बहकाता है मुझे उस खत की पंक्तियों में घर याद आता है मुझे।। वो पापा के पीठ
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Dec 11, 20251 min read
यादों की बात ही कुछ अलग है
By Sudarshan Hon यादों की बात ही कुछ अलग है बीते लम्हों की ये एक झलक है कभी किसी का प्यार याद आता है कभी किसी की नफरत कभी किसी की दोस्ती याद आती हैं कभी किसी की फितरत याद आते हैं वो खडूस से टीचर और उन्होंने की हुई जमके पिटाई और दुसरी तरफ वो इंग्लिश की मॅम याद हैं उनकी हर बात सिखाई याद आता हैं वो दोस्तों का ग्रुप और साथ में की हुई पढ़ाई और जब खेल खेल में आपस में हो जाती थी भयंकर लड़ाई पापा ने दी हुई पहली साइकल और पहली बार जब उससे गिरे थे पहली आई घुटने की चोट औ
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Dec 11, 20252 min read
सुना है आप हमारे शहर आ रही हो
By Sudarshan Hon सुना है आप हमारे शहर आ रही हो, मानो किनारे से मिलने लहर आ रही हो। वो किनारा जो तरसा है आपके मिलन के लिए, जैसे तरसती है धरा सूरज की किरण के लिए। कैसे स्वागत करें आपका, जब हमारा मिलाप हो? फूल भी कैसे दें उसे जो खुद एक गुलाब हो। ये हो सकता है कि हम फैला दें बाहें, या ज्यादा से ज्यादा घुटनों पे बैठ जाएं। कैसे बताएं आपको, मन कितना आनंदित होगा, आपके आने से हमारा आंगन सुगंधित होगा। इस बार आओगी तो जाने की जल्दी मत करना, शहर
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Dec 11, 20251 min read
खुद को ही तू खोयेगा।।
By Sudarshan Hon अपनों के बीच प्यार का कबतक तू बीज बोयेगा। उनको पाते पाते एकदिन खुद को ही तू खोयेगा।। उनकी कश्ती समंदर में आगे ही निकल जायेगी। उस किनारे की मिट्टी भी फिर तेरे काम न आयेगी।। समंदर की बडी लहरों से तू खुद ही बह जायेगा।। उनको पाते पाते एकदिन खुद को ही तू खोयेगा।। जिंदगी तो वो बडी ऐशोआराम की जीयेंगे । उनकी महंगी शराब में तुझे घुलाकर पी लेंगे ।। उनके सुख का एक घूँट भी तू ना पी पायेगा । उनको पाते पाते एकदिन खुद को ही तू खोयेगा।। बाजू से अपने उनकी गाडीयाँ जाते देखेगा
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Dec 11, 20251 min read
देश से प्यार
By Sudarshan Hon देश से प्यार, देश से प्यार क्या होता है देश से प्यार? वही क्या, जो साल में उमड़ता है गिनकर दो बार। सुबह स्कूल में जाकर जयकार के नारे लगाए, टीवी पर बॉर्डर मूवी देखी, वतन पर चार गाने चलाए। एकाध रैली में जाकर शान से तिरंगा लहराया, एक था हाथ में, एक छाती पर लगाया। जन-गण-मन गाकर उसे हाथ से सलामी दी, दो भाषण सुन लिए हमने, तालियों से उनकी प्रशंसा की। अंत में लड्डू खाकर दोपहर को सो गए हम, हाथ का झंडा कोने में तोड़ रहा था मानो दम।
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Dec 11, 20251 min read
चलते है
By Sudarshan Hon चलते हैं, चलते हैं दूर कहीं चलते हैं। फूल जहां सौ नहीं, एक रंग के खिलते हैं। जहाँ सीमा, देश-विदेश न हो, जहाँ धर्म, जाति और पंथ न हो। न जाने जहाँ कोई ऊँच-नीच, जहाँ नफ़रतों का कोई गंध न हो। आओ ढूंढें ऐसी जगह, ऐसी जगह मिलते हैं। चलते हैं… अंधियारा घोर है छाया हुआ, मानव मानव का नहीं रहा। सब एक ख़ुदा के अंश हुए, पर यहाँ न उसका वंश रहा। पापी दुनिया को ऐसे, आओ मिलकर भूलते हैं। चलते हैं... By Sudarshan Hon
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Dec 11, 20251 min read
Anti-Social
By Shreya Deep and dark, those eyes, a drop of empathy seized and locked into the heart, once broken and creased. No way it can be unleashed, locked for too long, it ceases to exist. Had it not been broken, had it not been creased, how happy and cheerful it could have been. By Shreya
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Dec 11, 20251 min read
Insecurity
By Shreya This huge demonic tree no plant grows underneath no hope is left to be nor a twig of faith to breathe Planted it unaware or out of shear envy by my own my very own from whom I came to be Fed by doubts and watered by anxiety extends its branch to extremity, this blood thirsty insecurity By Shreya
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Dec 11, 20251 min read
Unwinding Self
By Shreya Unravelling the weave called mind, Sliding life’s cassette into rewind. I read my lived days like a book— what they gave, and what they took. What essence do they hold? Did experience carve their quiet mould? Are my hopes and fears true, or just a collage, pasted with glue? Unwinding the knots of thought— was it right, what I was taught? Am I more than all I got— a flowing art, or a needless blot By Shreya
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Dec 11, 20251 min read
My Mentor
By Shreya Her grit and her dedication made her my inspiration. She put the concentrate in my concentration and added thrust to my aviation. She caught me midway in deviation, shifting into fifth gear of transformation. Her counseling and her motivation brought us close to the destination. Her vessels wait for time’s decoration— its slow reveal: the grace of patination. Her legacy will shine, as her artworks live their lives to fruition. By Shreya
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Dec 11, 20251 min read
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