यादों का एक खत
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Sudarshan Hon
यादों का एक खत
समय दे जाता है मुझे।
उस खत की पंक्तियों में
घर याद आता है मुझे।।
वो माँ के हाथ की सब्जी
और घी से लिपटी रोटीयाँ।
बहना के लंबे लंबे बाल
और उनकी बँधी दो चोटीयाँ।।
आज भी उस लोरी का स्वर
प्यार से सहलाता है मुझे।
उस खत की पंक्तियों में
घर याद आता है मुझे।।
वो घना सा नीम का पेड
जिसपर हम झूला झूलते थे।
वो आँगन के फूल गुलाब
सुबह रंगीन किये खिलते थे।।
धूप में आया कूल्फीवाला
आज भी बहकाता है मुझे
उस खत की पंक्तियों में
घर याद आता है मुझे।।
वो पापा के पीठ की सवारी
और दादी की दिलचस्प कहानी।
भाईयों के साथ खेला हुआ खेल
जहाँ होती थी बस मेरी मनमानी।।
बडों के संस्कारों का सुगंध
आज भी महकाता है मुझे।
उस खत की पंक्तियों में
घर याद आता है मुझे ।।
By Sudarshan Hon

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