सुना है आप हमारे शहर आ रही हो
By Sudarshan Hon
सुना है आप हमारे
शहर आ रही हो,
मानो किनारे से मिलने
लहर आ रही हो।
वो किनारा जो तरसा है
आपके मिलन के लिए,
जैसे तरसती है धरा
सूरज की किरण के लिए।
कैसे स्वागत करें आपका,
जब हमारा मिलाप हो?
फूल भी कैसे दें उसे
जो खुद एक गुलाब हो।
ये हो सकता है कि
हम फैला दें बाहें,
या ज्यादा से ज्यादा
घुटनों पे बैठ जाएं।
कैसे बताएं आपको,
मन कितना आनंदित होगा,
आपके आने से हमारा
आंगन सुगंधित होगा।
इस बार आओगी तो
जाने की जल्दी मत करना,
शहर के साथ-साथ
लोगों को दिलों में भरना |
प्यारे हैं यहाँ के लोग,
इन्हें प्यार पाना भी आता है,
जैसे लहर के आने से
किनारा भीग जाता है।
By Sudarshan Hon

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