चलते है
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Sudarshan Hon
चलते हैं, चलते हैं
दूर कहीं चलते हैं।
फूल जहां सौ नहीं,
एक रंग के खिलते हैं।
जहाँ सीमा, देश-विदेश न हो,
जहाँ धर्म, जाति और पंथ न हो।
न जाने जहाँ कोई ऊँच-नीच,
जहाँ नफ़रतों का कोई गंध न हो।
आओ ढूंढें ऐसी जगह,
ऐसी जगह मिलते हैं।
चलते हैं…
अंधियारा घोर है छाया हुआ,
मानव मानव का नहीं रहा।
सब एक ख़ुदा के अंश हुए,
पर यहाँ न उसका वंश रहा।
पापी दुनिया को ऐसे,
आओ मिलकर भूलते हैं।
चलते हैं...
By Sudarshan Hon

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