यादों की बात ही कुछ अलग है
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Sudarshan Hon
यादों की बात ही कुछ अलग है
बीते लम्हों की ये एक झलक है
कभी किसी का प्यार याद आता है
कभी किसी की नफरत
कभी किसी की दोस्ती याद आती हैं
कभी किसी की फितरत
याद आते हैं वो खडूस से टीचर
और उन्होंने की हुई जमके पिटाई
और दुसरी तरफ वो इंग्लिश की मॅम
याद हैं उनकी हर बात सिखाई
याद आता हैं वो दोस्तों का ग्रुप
और साथ में की हुई पढ़ाई
और जब खेल खेल में आपस में
हो जाती थी भयंकर लड़ाई
पापा ने दी हुई पहली साइकल
और पहली बार जब उससे गिरे थे
पहली आई घुटने की चोट
और फिर पापा की डांट से डरे थे
याद आता हैं माँ का लाड प्यार
जब वो २ कहके ३ रोटियां खिलाती थीं
और रात को फिर गोद में लेके
जन्नत की नींद सुलाती थीं
याद आता हैं कॉलेज का पहला दिन
और चारों तरफ फैली हरियाली
और फिर वो कॉलेज का कॅंन्टीन
जहां पे पकाते थे पुलाव खयाली
याद आता हैं वो पहला इश्क
और पागलपन पहले प्यार का
वो एकदम बचकानी हरकतें
जिनमें साथ होता था एक यार का
फिर याद आता हैं पहला ब्रेकअप
और पहली बार टूटा हुआ दिल
और फिर वो दिलजले का गम
जिसमें होते थे सारे दोस्त शामिल
कभी याद आता हैं किसी के आने का दिन
कभी याद आता हैं किसी के जाने का दिन
और फिर कितने रोए थे ना हम
जब रहना पड़ा था किसी के बिन
बुढ़े को अपनी जवानी याद आती हैं
और जवान को अपना बचपन
और जब आखरी सांस लेते हैं
तब तो याद आता हैं पूरा जीवन
यादों से ही हमने सब देखा है
यादों से ही हमने सब सिखा है
वैसे तो जिन्दगी बस काटते हैं हम
यादों ने ही हमें जिंदा रखा है
By Sudarshan Hon

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