क्यों सोचता तेरा मन
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Sudarshan Hon
क्यों सोचता तेरा मन
जिंदगी से हारा है तू।
अमावस को भी उजाला करे
वो आसमाँ का तारा है तू।।
मुसीबतों से डरकर तू
मत माँग सुख की भीख।
कदम कदम पर मेरे यार
गलतीयों से बस तू सीख।।
पता है मुझे तेरे
संकट होंगे बहोत गहरे।
लेकिन वो मुसाफिर है तू
जो चीर दे सागर की लहरे।।
काम ऐसे कर जिंदगी में
मुसीबते भी तुझे दूर भगाये।
खुद पर रख विश्वास इतना
कि मंजीले भी तुझे गले लगाए।।
जब भी तू गम में होगा
सोचना कितनों का है तू प्यारा।
क्योंकि कोयले की खान में
छिपा हुआ तू ही है वो हीरा।।
जिंदगी से अब तू
शिकायते कम रखना।
हाथ की लकीरे बदल दे
इतना खुद में दम रखना।।
By Sudarshan Hon

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