देश से प्यार
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Sudarshan Hon
देश से प्यार, देश से प्यार
क्या होता है देश से प्यार?
वही क्या, जो साल में
उमड़ता है गिनकर दो बार।
सुबह स्कूल में जाकर
जयकार के नारे लगाए,
टीवी पर बॉर्डर मूवी देखी,
वतन पर चार गाने चलाए।
एकाध रैली में जाकर
शान से तिरंगा लहराया,
एक था हाथ में,
एक छाती पर लगाया।
जन-गण-मन गाकर
उसे हाथ से सलामी दी,
दो भाषण सुन लिए हमने,
तालियों से उनकी प्रशंसा की।
अंत में लड्डू खाकर
दोपहर को सो गए हम,
हाथ का झंडा कोने में
तोड़ रहा था मानो दम।
मन ही मन वो चीख रहा था,
लानत है ऐसी देशभक्ति पर।
वतन से इश्क़ तो उन्हें था,
जो मर मिटे इस मिट्टी पर।
जिन्होंने घर-बार छोड़कर
सीमा पर कुर्बानी दी,
लेकर सीने पर गोलियां
वतन के लिए जवानी दी।
और तुम हो कि साल भर
अपने ही देश को कोसते हो।
"ये नहीं, वो नहीं"
कहकर इतना बस रोते हो।
भगतसिंह, आजाद, सावरकर
याद है तुम्हें इनका बलिदान?
सुनाओ ज़रा इतिहास उनका,
त्याग दिए जो देश पे प्राण।
क्या नाज है तुम्हें हिमालय पर?
प्रेम है तुम्हारा नदियों से?
गूंजी हैं कभी आवाजें जो
आती हैं पहाड़ों की वादियों से?
स्मरण है ऋषि-मुनियों का?
ध्यान दीया उनके विधानों पर?
क्या सच में तुम्हें गर्व है
अपने वेद-पुराणों पर?
जय-जयकार के नारे लगाकर
कोई देशभक्त नहीं बनता,
देश की प्रगति के लिए
जब तक रक्त नहीं खौलता।
कर्म से जब तू वतन की
उन्नति का गान गाएगा,
तभी, ओ मेरे देशप्रेमी,
तू देशभक्त कहलाएगा।
By Sudarshan Hon

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