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Poetry
अच्छा होता अगर...
By Aaryan Gupta मरहम तो लगा लेते हो अक्सर ज़ख़्मों पर, अच्छा होता अगर ज़ख़्म दिए ही न होते तो। राज़ों को राज़ रखकर ख़ुश नज़र आते हो, अच्छा होता अगर हमसे भी साझा करते तो। दिल में उतरने की ग़ुस्ताख़ी तुम ही किया करते थे, अच्छा होता अगर हमें यूँ तन्हा न करते तो। माना तुम्हें अब हम नहीं भाते शायद, अच्छा होता अगर ये हमसे आकर कहते तो। बाबा कहते थे - धोखा अपनों की सौग़ात है, अच्छा होता अगर उन्हें झूठा साबित करते तो। देखकर तुम्हें अक्सर आँखें भीग जाती थीं, अच्छा होता अगर हमें देख मुस
Hashtag Kalakar
Dec 11, 20251 min read
बेहिसाब हसरतें
By Aaryan Gupta बेहिसाब हसरतों में ना उलझो, जो हासिल है उसे ही संजो लो। माना तुमको तारों की नुमाइश में चाँद को ताकने का जुनून है, सब पाकर भी न कोई चैन, न कोई सुकून है। आसमान में उड़ने की इबादत करते हो तुम, दौलत, शोहरत की चाहत रखते हो तुम। इतना हार के भी, न चैन की एक साँस भी भर पाते हो, इतने नादान हो कि इस बेबसी की नगरी में, आज भी बरकत की आस रख पाते हो। और फिर भी गिर के उठने की हिमाकत रखते हो, लोग इतने दगाबाज़ ठहरे, तुम उनको माफ़ करने की शराफ़त रखते हो... इतनी उम्मीद तो जनता क
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Dec 11, 20251 min read
बिस्तर और मैं
By Aaryan Gupta गहरी ठंडी रात का रोज़ बेसब्री से इंतज़ार होता है मुझे, मानो जैसे रोज़ अपने बिस्तर से प्यार होता है मुझे। जब 10 बजते ही चादर में खुद को लपेट लेता हूँ, मानो अपनी सारी तन्हाई एक पोटली में समेट लेता हूँ। देर अँधेर में, चाँद खिड़की से ताकता है मुझे, मैं उसको देख आँखें मूँद लेता हूँ, मानो पलकें पड़ते ही सब नाते मिट जाते हों, ऐसे मैं उस बिस्तर पर सुकून ढूँढ लेता हूँ। फिर एक पल बाद हसीन ख़्वाबों का दीदार होता है मुझे, यूँ रोज़ अपने बिस्तर से प्यार होता है मुझे। हवाएँ
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Dec 11, 20251 min read
ख़ुद से मिलने की राह में......
By Aaryan Gupta निकला था मैं मोती बीनने, सोचा था हीरों की एक दुनिया बसाऊँगा। क्या ख़बर थी, भीड़ में चलते-चलते, ख़ुद ही से दूर होता जाऊँगा। कोरा काग़ज़ लिए बैठा हूँ आज भी, ज़िंदगी के एक ऐसे मोड़ पर, जहाँ कहने को कुछ नहीं बचा है, पर शायद आज कुछ कह पाऊँगा। उम्मीदों को गिरवी रखकर, हिम्मत को क़र्ज़ पर उठाया था। सपनों से समझौता करते-करते, हक़ीक़त को मैंने ठुकराया था। आज फिर निकला हूँ घर से, अपने नए किरदार की तलाश में। शायद इस बार भटकूं नहीं, इन अधूरे ख़्वाबों की प्यास में। फिर निकल
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Dec 11, 20251 min read
प्रेम
By Aaryan Gupta कोई धन का प्यारा तो कोई तन का मारा , कोई आवारा इश्क़ की नाव में सवार है कोई भी हरा न पाए उसको , जिसका प्रेम ही इकलौता वार है ! आइए उस प्रेम की कहानी सुनें, जो सैकड़ों के लिए एक नया विचार है , उन राधे श्याम की दास्तां सुनें , जिनकी भक्ति से ये संसार है ! ये उस समय की बात है जब राधा रमण ने क्या खूब इस जगत की रीत रची , एक दूजे से हार के , क्या खूब प्रेम की जीत रची ! ऐसी अमर प्रेम की कहानी लिखी उन्होंने , कि सदियों सदियों तक सीख मिली , ऐसे आलौकिक दृश्य की रचना की
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Dec 11, 20252 min read
गुलाब
By Aaryan Gupta माली तो यूँ ही बदनाम है, आजकल गुलाब के ज़रिए मोहब्बत बेचना तो आशिकों का काम है। अगर सच में एक कली से किसी का जहाँ सज जाता, तो यक़ीन मानो गुलाब कभी न मुरझाता। उस गहरे रंग में लोग अक्सर डूब जाते हैं, काँटों को भुलाकर बस पत्तों को निहारे जाते हैं। मगर जब अनदेखा काँटा चुभता है, तो वही रंग लहू बनकर नज़र आता है। और जब वो गुलाब फिर से याद आता है, तो आँखों में नमी छोड़कर चला जाता है। एक बार मान भी लूँ कि उस गुलाब ने सारी खुशियाँ दे भी दीं, खुद फीका पड़कर तुम्हारी ज़िं
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Dec 11, 20252 min read


नमन
By Santosh Kalapahad By Santosh Kalapahad
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Dec 11, 20251 min read


Aye Zindagi Kuch To Raham Kar
By Urvashivansh By Urvashivansh
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Dec 11, 20251 min read


मेरी सहेली चाय
By Urvashivansh By Urvashivansh
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Dec 11, 20251 min read


मौत के बाद ही
By Urvashivansh By Urvashivansh
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Dec 11, 20251 min read
मस्ती में रहना
By Japneet Kaur सब ऊपर वाले की रज़ा में ख़ुश है ये चांद सूरज और पेड़ पौधे मस्त है क्योंकि ये जानते हैं के ना कल है ना परसो जो कुछ भी है वो इस पल में है आज को इस पल को चुनना चांद सूरज की तरह मस्ती में रहना सिखने सिखाने के लिए ये कल है और पारसो भी कि तुम आज मैं खुश रहना जैसे चाँद सितारे और सूरज By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
खामोश
By Japneet Kaur किसी को हमारा बोलना पसंद नहीं था हम खामोश हो गए खामोश हुए तो दिल में शोर और हो गए। By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
Smj Lenda
By Japneet Kaur ਅਗਰ ਕੋਈ ਸਮਝ ਲੰਦਾ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਇਜ਼ ਮੁਸਕਰੰਦੇ ਹੋਏ ਚਹਿਰੇ ਦੇ ਪਿਚੇ ਦਰਦ ਲਭ ਲਂਦਾ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਇਸ ਸ਼ੋਰ ਨੂੰ ਕੋਈ ਸ਼ਾਂਤ ਕਰ ਦੇਂਦਾ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਸੀਨੇ ਲਾ ਲਾਂਦਾ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਚਾਰ ਲੋਗ ਨਾ ਹੁੰਦੇ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਸੁਪਨੇ ਨਾ ਹੁੰਦੇ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਮੇਰੀ ਗੁਸੇ ਦੀ ਵਜਾਹ ਸਮਜ ਜੰਦਾ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨਹੀ ਜਿੰਦਗੀ ਕੋਲੋ ਅਗਰ ਕੋਈ ਅਪਨੇ ਨਾ ਬਾਦਲ ਦੇ ਤੇ ਕੋਈ ਗਿਲਾ ਨ
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Dec 11, 20251 min read
Batienn
By Japneet Kaur के हम अपनों में अजनबी थे के कुछ बातें अपनों से कहनी हैं के कुछ हकीकत ऐसी है के हम अपनों में अजनबी थे By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
Khwahishan
By Japneet Kaur ਏਹ ਖਵਾਹਿਸ਼ਿਆ ਵੀ ਅਜੀਬ ਨੇ ਕੋਈ ਪਾ ਰੇਹਾ ਹੈ, ਕੋਈ ਖੋ ਰੇਹਾ ਹੈ ਕਿਸੇ ਦਾ ਹੁਨ ਖਵਾਹਿਸ਼ਿਆ ਨਾਲ ਕੋਈ ਮਤਲਬ ਨਹੀਂ ਤੇ ਕਿਸ ਦਾ ਖਵਾਹਿਸ਼ਿਆ ਬਿਨ ਕੋਈ ਦਿਨ ਨਹੀਂ ਕੋਇ ਹਸ ਹਸ ਏਹਨਾ ਖਵਾਹਿਸ਼ਿਆ ਨੂ ਹਕੀਕਤ ਬਨਾ ਰੀਹਾ ਤੇ ਕੋਈ ਰੋ ਰੋ ਅਪਨੀ ਖਵਾਹਿਸ਼ਿਆ ਨੂ ਖਾਤਮ ਕਰ ਰੀਹਾ ਖਵਾਹਿਸ਼ਿਆ ਨੂ ਹੂੰ ਖਾਮੋਸ਼ ਕਰ ਦਿਤਾ ਹੈ ਈਸ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਦਾ ਬੜਾ ਸ਼ੋਰ ਹੈ ਝੂਟ ਕਹੰਦੇ ਨੇ ਲੋਗ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਸਕੂਨ ਦੀਨਦੀ ਹੈ ਕਾਯੀ ਵਾਰ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਇੰਸਾਨ ਨੂੰ ਰੋਲ ਡੇਂਦੀ ਹੈ By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
Waqt
By Japneet Kaur ਵਕਤ ਤੂ ਇਜਾਜ਼ਤ ਦੇਵੇ ਤਨ ਮੈਂ ਪਿਚੇ ਜਾਨਾ ਹੈ ਕੇਹੰਦਾ ਕਿਓ ਮੈਂ ਕੇਹਾ ਹੈ ਕੁਝ ਚਾ ਅਧੂਰੇ ਰਹਿ ਗਏ ਨੇ ਕੁਝ ਖਾਬ ਓਥੇ ਹੀ ਰਹਿ ਗਏ ਨੇ ਕੁਝ ਖਵਾਹਿਸ਼ ਪੂਰੀਆ ਕਰਨਾ ਨੇ ਕੁਝ ਅਧੂਰੇ ਪਲ ਓਥੇ ਹੀ ਰੇਹ ਗਏ ਨੇ By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
Nazree
By Japneet Kaur ਨਜ਼ਾਰਾ ਚੋ ਦਰਦ ਨੂੰ ਕੋਈ ਫਰੋਲ ਕੇ ਨਾ ਦੇਖ ਪਇਆ ਐਸੀ ਰੋਂਦੇ ਰੇਹ ਗਏ ਚੁਪ ਕਰੋ ਕੋਈ ਨਾ ਆਇਆ ਚੁਪ ਕਰੋਨ ਕੋਈ ਨਾ ਆਇਆ By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
ज़िंदगी का तोहफा
By Japneet Kaur तोहफे में मिली ज़िंदगी को यूँ ना गुज़र तू ये कीमत पालो को ना नकार तू जितने के मकसद से ज़िंदगी को ना खेल तू सकुन को पैसों से ना तोल तू के पलड़ा हमेशा ज़िंदगी का बारा होता है और बाकी मकसद मंज़िल पैसों का तो धोखा होता है By Japneet Kaur
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Dec 11, 20251 min read
नादान
By Japneet Kaur हाँ थोड़ी सी नादान हूँ थोड़ी सी अनजान हूँ इस दुनिया से बहखबर हूँ के थोड़ी सी नादान हूँ दुनिया की चकाचौंध न भाती है मुझे दुनिया की चालकियाँ न आती हैं मुझे समझ में इस दुनिया की न आती मुझे समझ है ना जाने यह दुनिया किस दौड़ में है By Japneet Kaur
Hashtag Kalakar
Dec 11, 20251 min read
दोस्त
By Japneet Kaur दूर से देखा तो अजनबी दिखाई दिए, पास से गुज़रे तो गुज़रे हुए लम्हे दिखाई दिए, आँखें देखना चाहती थीं वो हकीकत जो ख्वाबों में सजाई थी लेकिन जब नज़रे मिलीं तो उनको हमारी आँखों के अल्फाज़ कहाँ दिखाए दिए और अगर देख लेते पलट के एक बार तो शायद अजनबी से दोस्त ही कहलवाए जाते! By Japneet Kaur
Hashtag Kalakar
Dec 11, 20251 min read
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