बेहिसाब हसरतें
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Aaryan Gupta
बेहिसाब हसरतों में ना उलझो, जो हासिल है उसे ही संजो लो।
माना तुमको तारों की नुमाइश में चाँद को ताकने का जुनून है,
सब पाकर भी न कोई चैन, न कोई सुकून है।
आसमान में उड़ने की इबादत करते हो तुम,
दौलत, शोहरत की चाहत रखते हो तुम।
इतना हार के भी, न चैन की एक साँस भी भर पाते हो,
इतने नादान हो कि इस बेबसी की नगरी में, आज भी बरकत की आस रख पाते हो।
और फिर भी गिर के उठने की हिमाकत रखते हो,
लोग इतने दगाबाज़ ठहरे,
तुम उनको माफ़ करने की शराफ़त रखते हो...
इतनी उम्मीद तो जनता को सियासत से नहीं,
जितनी तुम जीतने की शिद्दत रखते हो।
अब तो हम थक गए तुम्हारी इस ज़िंदगी से लड़ने की ताक़त को देख,
सारे मुकदमे हारकर भी इस दुनिया के प्रति वकालत को देख।
रो देते हैं अक्सर हम तुमको देख,
और तुम हर वक़्त यूँ मुस्कुराहट कैसे रख लेते हो,
माना तुमने सब खो दिया,
फिर भी दूसरों के लिए इनायत कैसे रख लेते हो।
पहले भी बोला करते थे, फिर दोहराएंगे,
जो मुक़द्दर में नहीं, उसको कितना और चाहेंगे,
बेहिसाब हसरतों में ना उलझो,
जो हासिल है, उसे ही संजो लो,
जो नसीब ने परोसा है, पहले वही खा लो,
उम्र तमाम हो गई उम्मीदों के पीछे भागते हुए,
अब कम्बख़्त सुकून की एक शाम तो पा लो!
By Aaryan Gupta

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