गुलाब
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
- 2 min read
By Aaryan Gupta
माली तो यूँ ही बदनाम है,
आजकल गुलाब के ज़रिए मोहब्बत बेचना तो आशिकों का काम है।
अगर सच में एक कली से किसी का जहाँ सज जाता,
तो यक़ीन मानो गुलाब कभी न मुरझाता।
उस गहरे रंग में लोग अक्सर डूब जाते हैं,
काँटों को भुलाकर बस पत्तों को निहारे जाते हैं।
मगर जब अनदेखा काँटा चुभता है,
तो वही रंग लहू बनकर नज़र आता है।
और जब वो गुलाब फिर से याद आता है,
तो आँखों में नमी छोड़कर चला जाता है।
एक बार मान भी लूँ कि उस गुलाब ने सारी खुशियाँ दे भी दीं,
खुद फीका पड़कर तुम्हारी ज़िंदगी रंगों से भर भी दीं।
पर ये इत्तेफ़ाक़ कायनात कितनी बार दोहराएगा?
क्या वही गुलाब किसी और को देकर तुम्हें भी लौटाएगा?
एक कली तो कमल की भी हो सकती थी,
मगर सोचो, काँटों से भरे गुलाब का भी कोई तो मक़सद रहा होगा।
ऐसे तो नहीं आया होगा गुलाब, लाने वाला भी कुछ तो चाह रहा होगा।
आस रखनी ही थी, तो अपने प्यार से रखते,
क्या पता वही तुम्हारा असली गुलाब बन जाता।
उसकी खुशबू यूँ फैलाते अपने जहाँ में,
कि शायद असली गुलाब भी उसके आगे फीका पड़ जाता।
तो आज मेरी एक बात ज़रूर मानो,
उस गुलाब को अपने आँगन में पालो।
जो मोहब्बत टूटी हुई कली न दे पाई,
वो शायद ये खिलता हुआ गुलदस्ता दे जाए।
जो कभी मिला नहीं, वही शायद अब तुम्हारी किस्मत को रास आ जाए।
क्यों न तुम खुद किसी का गुलाब बन जाओ,
और उनकी लटों में चुपके से सज जाओ।
उन्हें असली कली याद ही न आए,
तुम ऐसे चुपके से उनके आँगन में बस जाओ।
क्योंकि सच बोलूँ?
माली तो यूँ ही बदनाम है,
आजकल गुलाब के ज़रिए मोहब्बत बेचना तो आशिकों का काम है।

👍
Beautifully written
Amazing !!
अदभुत ❣️