ख़ुद से मिलने की राह में......
- Hashtag Kalakar
- Dec 11, 2025
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By Aaryan Gupta
निकला था मैं मोती बीनने,
सोचा था हीरों की एक दुनिया बसाऊँगा।
क्या ख़बर थी, भीड़ में चलते-चलते,
ख़ुद ही से दूर होता जाऊँगा।
कोरा काग़ज़ लिए बैठा हूँ आज भी,
ज़िंदगी के एक ऐसे मोड़ पर,
जहाँ कहने को कुछ नहीं बचा है,
पर शायद आज कुछ कह पाऊँगा।
उम्मीदों को गिरवी रखकर,
हिम्मत को क़र्ज़ पर उठाया था।
सपनों से समझौता करते-करते,
हक़ीक़त को मैंने ठुकराया था।
आज फिर निकला हूँ घर से,
अपने नए किरदार की तलाश में।
शायद इस बार भटकूं नहीं,
इन अधूरे ख़्वाबों की प्यास में।
फिर निकला हूँ मैं मोती बीनने,
इरादा है कि हीरों की दुनिया बसाऊँगा।
क्या पता, भीड़ में चलते-चलते,
मैं फिर से ख़ुद को ही पा जाऊँगा।
By Aaryan Gupta

🥺🥹