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पंख और पाँव - By Anita Bahuguna

2 hours ago
5 min read

Written By: Anita Bahuguna

Category: Short Story

Competition: Poetry and Creative Writing Competition 2026

Anita Bahuguna, writing under the title "Pankh Aur Paanv," offers a captivating short story featured in the Poetry and Creative Writing Competition 2026 by Hashtag Kalakar. This evocative narrative explores the themes of life transitions and the balance between aspirations and reality. With a delicate touch, Bahuguna invites readers to reflect on the journey of life, capturing the essence of movement from dreams to grounding realities within the framework of this prestigious competition.

About the Work

"Pankh Aur Paanv" is a contemplative exploration of life's phases, symbolized by the imagery of wings and feet. Anita Bahuguna intricately weaves a story of freedom, success, and the eventual need for grounding. The narrative gracefully portrays the dichotomy between the soaring ambitions of youth and the serene acceptance of life's later stages. Through vivid imagery, Bahuguna captures the essence of finding peace and stability in the midst of life's inevitable transitions.

Pankh Aur Paanv

Original Submission by Anita Bahuguna

पंख और पाँव

लेखिका-अनीता बहुगुणा

पंख फैलाकर उड़ते-उड़ते बड़ी दूर तक का इलाका अपने परिचय के दायरे में बाँध लिया था। शिक्षा की समाप्ति पर पाँव ज़मीन पर न टिकते थे जब तत्काल सफ़लता के खूबसूरत पंख मिल गए। इन हल्के और कोमल पंखों को थोड़ा फैलाकर जो उड़ान भरी उस उड़ान ने जीवन साथी तक पहुँचाया। जीवन साथी ने गगन का ऐसा एक नया आयाम दिया जहाँ उड़ान भरते-भरते बहुत कुछ समेटा, जिसके बोझ ने अपनी उपस्थिति की अनुभूति न होने दी; उन्मुक्तता का अहसास कभी कम नहीं होने दिया। कभी स्वतंत्रता तो कभी-कभी स्वच्छंदता का समावेश लिए इस उड़ान में कभी थकान महसूस न हुई थी। अचानक आज जीवन के इस यौवन रूपी गगन को अधेड़ावस्था रूपी यथार्थ के धरातल पर उतरना ही पड़ा, क्षितिज में बदलना ही पड़ा। धरा पर उतरते हुए नज़दीक आने पर कठोर शिलाखंड और प्रस्तर दिखाई दिए। गगन में इस बड़ी व ऊँची उड़ान का पुरस्कार भी कभी न मिला कि सूरज-चाँद या तारों को ही छू लिया हो पर हाँ! कुछ छूट गया, कुछ कमी रह गई हो ऐसी असफलता की भावना भी कभी महसूस नहीं हुई।

आज पहली बार थकान का अहसास होते हुए प्रतीत हुआ कि समय के साथ पंखों के उड़ने की गति शिथिल पड़ गई है और पंखों को समेटकर नीचे उतरने का समय आ गया है। उन्मुक्त आकाश की ऊँचाई में विचरण करते हुए रुकावटें हवा-सी गुज़र गईं, पंख जो मज़बूत थे, उड़ान भरने का दम जो था उनमें। इस दम के कम होते ही उड़ान निचली परतों व सतहों में सीमित होने लगी और धरती नज़र आने लगी। धरती पर उतरते हुए अहसास होता है कि स्वप्न और कल्पना की उड़ान भरनेवाले पंखों से स्थिरता देने वाले कदम मज़बूत होने आवश्यक हैं। एक दिन अपने बल पर खड़े होने की आवश्यकता पड़ती ही है। यह धरती कठोर सही पर विश्राम तो यहीं मिलता है, इसी कठोरता में। उड़ान ऊँचाई तक पहुँचा सकती है, ऊँचाई की अनुभूति के आनंद से उत्पन्न श्रेष्ठता का भाव और अद्भुत सफ़लता का उल्लास जगा सकती है पर विश्राम का वहाँ नाम भी नहीं है। विश्राम पाने तो धरा पर ही उतरना पड़ता है।

हाँ ! अब विश्राम चाहिए ।

पंख समेटकर उड़ान पर प्रतिबंध लगाने, उसे थामने का वक्त आ गया। खिड़की के परदे को खिड़की पर भली- भाँति फैलाते हुए स्वरा सोच रही थी कि अब पंख समेटने का समय आ गया।

इतना बड़ा घर, बाग- बगीचा, लॉन, स्विमिंग पूल सब कुछ तो था स्वरा के घर में। एक छोटी-सी लाइब्रेरी भी थी, पर पता नहीं क्यों अम्मा जी का वह झोपड़ीनुमा, कंक्रीट का बना घर याद आ रहा था जिसकी छोटी-सी बाउंड्री के भीतर आम, नींबू के पेड़, अंगूर की एक बेल और गेंदे के फूलों की चंद क्यारियाँ थीं। अपने बुकशेल्फ़ के शीशे पर हाथ फेरते हुए सोच रही थी कि अम्मा जी के दो कमरों के घर में बिस्तर-चादर, कपड़ों के अतिरिक्त इक्का-दुक्का चंदा मामा और संग्रह के नाम पर भागवत् गीता, हनुमान चालीसा और रामायण, बस और कुछ न था। कितना खाली-खाली लगता था। वहाँ कुछ भी तो न था पर आज इस अलमारी में इतना कुछ है पढ़ने को परन्तु समय किसे है? कुछ किताबें तो अनछुई ही रखी हैं। हाँ ! अम्मा जी तो अपनी इन तीन किताबों का पाठ नित्य प्राय: कर ही लिया करती थीं।

पंखों की शिथिलता की अनुभूति होते ही स्वरा अपने ससुराल के पैतृक घर में क्यों सिमटने लगी? उसे तो कितना पहले, कितनी दूर छोड़ आई थी। बुकशेल्फ छोड़कर सोफे पर बैठी तो बाबूजी के आराम कुर्सी आँखों के सामने डोलने लगी जिस पर पसरकर बैठते ही खुद-ब-खुद आँखें बंद होने लगती थीं।

स्वरा बालकनी में आकर खड़ी हो गई। इन विचारों को झटकना चाहती थी इसलिए बाहर यहाँ चली आई। बेंत से बने सुंदर झूले पर बैठी तो वो भी अम्मा जी के आम के पेड़ पर मोटी और भद्दी रस्सियों पर लटका वह झूला याद आने लगा। वही झूला जिस पर गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे झूलते थे जब हफ़्ते भर के लिए दादा-दादी के पास जाते थे। अब स्वरा भी तो दादी बन गई है। अरमानों से सजाए इस खूबसूरत घर में विदेश से वापस आए पोते-पोती को बहलाने, उनका मन लगाने के लिए कुछ भी तो आकर्षक दिखाई नहीं देता जिसके आकर्षण में वे बंध जाएँ। बेटा उसे बाँहों में भरकर विश्वास दिलाता है कि अब यहीं के दफ़्तर में नौकरी जारी रखेगा। बहू मुस्कुराकर उसका साथ देती है। बच्चे नए वातावरण में सामंजस्य बिठाने के साधन ढूँढने लगे हैं। अचानक स्वरा को थकान महसूस हुई, लगा जैसे और नहीं उड़ पाएगी! पंख समेटने का समय आ गया है। पंखों के सिकुड़ते ही उड़ान थम जाएगी और पाँव नीड़ तलाशने लगेंगे; आशियाना ढूँढने लगेंगे जहाँ विश्रांति प्राप्त हो सके।

झूले पर बैठे-बैठे नीचे बगीचे पर नज़र टिक गई। एक पक्षी ठुमक-ठुमक कर बगीचे में केंचुए तलाशता फिर हल्की-सी उड़ान भरता और फिर घास के किनारे कीचड़वाली मिट्टी में आहार ढूँढने लगता। मिलेगा या नहीं, इस सोच से चिंतित नहीं..... बस काम में निमग्न, क्रिया में रत। स्वरा को अपने कदमों में भी फिरकन महसूस हुई, पक्षी के कदमों की तरह ही थिरकन और उसके कदम भी सुदूर मैदानों, पहाड़ों और जंगलों की मिट्टी को पार कर अपने पैतृक घर की ओर बढ़ने के लिए मचल उठे जिसे बहुत साल पहले अम्मा के गुजर जाने के बाद ताला लगाकर लौट आई थी, बेंगलुरु के अपने इस विशाल बंगले में।

हाँ, समय आ गया ढलती रोशनी में क्षितिज को निहारने का, पंख समेटने का और पैत्रिक आशियाने के सुरक्षा कवच में सिमट जाने का !

क्लांत मन की थकान धीरे-धीरे उतरने लगी। स्वरा के शिथिल क़दमों में गति समाने लगी और होंठों पर मुस्कान उभर गई! अपने गाँव लौटने के विचार से प्रफ्फुलित मन तैयारी करने भीतर कमरे की ओर दौड़ पड़ा।

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About the Competition

The Poetry and Creative Writing Competition 2026 by Hashtag Kalakar serves as a distinguished platform for writers to showcase their creative prowess. The competition celebrates diverse voices and literary excellence, offering participants the opportunity to present their works to a wider audience. It stands as a testament to the enriching power of storytelling and the arts.

We extend our heartfelt gratitude to Anita Bahuguna for sharing her poignant short story, "Pankh Aur Paanv," in the Poetry and Creative Writing Competition 2026. Her reflective narrative offers readers a profound exploration of life's journey, leaving a lasting impression. Thank you, Anita, for your contribution to this esteemed event.

About Hashtag Kalakar

Hashtag Kalakar is a creative platform dedicated to providing artists, writers, singers and other creative talents with opportunities to showcase their work and reach wider audiences through competitions, features and creative initiatives.

 
 
 

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