एक सच्चा पार्श्व गायक अपनी सकारात्मक आत्मा के माध्यम से ही बनता है। - By Pushpinder Singh
- Hashtag Kalakar
- 1 hour ago
- 4 min read
Written By: Pushpinder singh
Category: Essay
Competition: Poetry and Creative Writing Competition 2026
In the captivating essay "एक सच्चा पार्श्व गायक अपनी सकारात्मक आत्मा के माध्यम से ही बनता है।" by Pushpinder Singh, we delve into the profound essence of what makes a true playback singer. Submitted to the Poetry and Creative Writing Competition 2026, this piece gracefully explores the interplay between a singer's positive spirit and their musical expression, highlighting the intrinsic connection between art and soul.
About the Work
Pushpinder Singh's essay provides a heartfelt exploration of the qualities that define a true playback singer. It emphasizes the significance of a positive mindset, simplicity, and innate musical understanding in conveying genuine emotions through song. The essay draws on inspirations from iconic singers like Kishore Kumar and Lata Mangeshkar, illustrating the profound impact of their soulful expressions on audiences worldwide.
एक सच्चा पार्श्व गायक अपनी सकारात्मक आत्मा के माध्यम से ही बनता है।
Original Submission by Pushpinder singh
निबंध:सच्चा पार्श्व गायक अपनी सकारात्मक आत्मा के माध्यम से ही बनता है।
वास्तविक पार्श्वगायक: पार्श्वगायक वह होता है जो वास्तविक भावों से परिपूर्ण होता है और जिसका स्वभाव सरल और सौम्य होता है। सकारात्मक दृष्टिकोण, सरलता, भोलापन और गायन का ज्ञान किसी भी गीत के वास्तविक भावों को व्यक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तविक पार्श्वगायक हमेशा गीत की स्थिति को फिल्म की पृष्ठभूमि के अनुसार समझते हैं। स्टूडियो में गायन के दौरान इंद्रियों, हाथों और स्वतः बंद हो जाने वाली आंखों की अभिव्यक्ति पार्श्वगायक की पहचान होती है। हर गायक की अपनी अभिव्यक्ति होती है, लेकिन आंतरिक भावनाएं हर वास्तविक पार्श्वगायक की एक समान होती हैं। गीत के शब्दों को कागज पर देखकर और इंद्रियों के माध्यम से अपनी आवाज को वास्तविक प्रभाव देने के लिए आवश्यक बल प्रदान किया जाता है।
लता जी के अनुसार, 75% पार्श्व गायन उनकी सुरुचिपूर्ण प्रकृति से प्रेरित है, जबकि 25% गायन की तकनीकों के ज्ञान से। जब ये 25% ज्ञानवर्धक तकनीकें गायिका की सुंदर, सरल और मौलिक आत्मा पर प्रभाव डालती हैं, तो उनकी आवाज़ देश की मूल संस्कृति और सभ्यता को छू लेती है। देश की संस्कृति और सभ्यता से जुड़ी यह आवाज़ उसी देश के प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को छू जाती है, और जब इन्हीं गीतों का अनुवाद किसी अन्य देश की संस्कृति और सभ्यता में किया जाता है, तो वही वास्तविक स्पर्श विश्व के हर कोने तक पहुँचता है। इसका अर्थ है कि मानवता एक ही भाव को विभिन्न भाषाओं में भी आकर्षित करती है। गायकों के अच्छे स्वभाव की दृष्टि से ही माँ सरस्वती उनके गले में बसती है।
"जब किसी व्यक्ति का दृष्टिकोण शत प्रतिशत सकारात्मक होता है, तो संगीत स्वयं उसकी आत्मा से उत्पन्न होता है।"
जो इंसान बचपन से अपने परिवार, समाज, देश की ज्यादा जिम्मेवारियां उठाता है वो छोटे-छोटे अनुभवों से जिंदगी के सुख, दुख, मदद, अच्छी सलाह देना, इंसानियत में भरोसा करना जानता है और ये विशाल अनुभव असल और गहरे भावों को जन्म देता है। ये भाव ही असल सिंगर को बनाता है। किशोर कुमार जी ने कभी गाना नहीं सीखा पर उनके सच्चे भाव ही उनकी शिक्षा थी। उनका हर गीत अमर है, वो सबसे बड़े गायक बनके उभरे थे।
संगीत गुरु: मैंने भी अपने गुरु किशोर दा से बहुत कुछ सीखा है। पिछले दस वर्षों से मैं बॉलीवुड में गा रहा हूँ। मुझे किशोर दा की आवाज़ की बनावट बहुत पसंद है और मैं खुद भी उसी शैली में गाना चाहता हूँ। बॉलीवुड इंडस्ट्री को मेरे गाने बहुत पसंद हैं और लोग मुझे और मेरे गानों को बहुत पसंद करते हैं। संगीत सीखने में गुरुओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। गुरुओं के मार्गदर्शन से संगीत शैलियों को समझना आसान हो जाता है। मैंने कहीं से संगीत की बहुत अधिक शिक्षा नहीं ली है, लेकिन सुरेश वाडेकर संगीत अकादमी, सांताक्रूज़, मुंबई में तीन महीने के प्रशिक्षण में मैंने बुनियादी बातें सीख लीं। लेकिन स्वाभाविक रूप से मैंने किशोर दा की शैली से ही बहुत कुछ सीखा। इसलिए गुरुओं की शैली अपने आप में संपूर्ण शिक्षा है। गुरुओं से शिक्षा प्राप्त करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन बॉलीवुड में इसकी शुरुआत से ही यह प्रचलित है। अधिकांश पार्श्व गायकों ने अपने गुरुओं से ही संगीत सीखा है। लता जी, किशोर कुमार जी, कुमार सानू जी के अपने संगीत गुरु हैं और इन्हीं गुरुओं की बदौलत ये सभी विश्व की नजरों में बड़े सितारे हैं।
मेरे मौलिक गीत: मैंने मुंबई के बॉलीवुड स्टूडियो में कई नए गाने गाए हैं, जिनमें से कुछ बेहतरीन गाने नीचे दिए गए हैं। आशा है आप इन्हें जरूर सुनेंगे और इनका आनंद लेंगे। भारतीय सेना के लिए राष्ट्रीय गीत गाना और भारत सरकार के मंत्रालय से सराहना मिलना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।
https://youtu.be/SrKiGAKk1yg?si=y7N70hONuWf6YDC4
https://youtu.be/u1w9KVO7HJc?si=L0TTYbGAE3hHFvSt
https://youtu.be/B9PO3fX3AGg?si=DMJNvubiUvE7mn5v
https://youtu.be/wQp0MGHoEys
https://youtu.be/vvzbaNkDGhE?si=B_yMgHVRmG_NepYI
About the Competition
The Poetry and Creative Writing Competition 2026 by Hashtag Kalakar is a prestigious event celebrating creativity and literary expression. It invites participants from diverse backgrounds to share their unique perspectives through poetry, essays, and creative writing, fostering a vibrant community of writers and poets.
We extend our heartfelt gratitude to Pushpinder Singh for his insightful essay, "एक सच्चा पार्श्व गायक अपनी सकारात्मक आत्मा के माध्यम से ही बनता है।" This contribution to the Poetry and Creative Writing Competition 2026 enriches our understanding of the soulful essence of playback singing. Thank you, Pushpinder, for sharing your perspective with us.
About Hashtag Kalakar
Hashtag Kalakar is a creative platform dedicated to providing artists, writers, singers and other creative talents with opportunities to showcase their work and reach wider audiences through competitions, features and creative initiatives.

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