इरादा
By Bansari Pritesh
यूँ नज़रें न मिलाओ मुझसे,
मैं जुदा होने के इरादे से आई हूँ।
थोड़ा दूर बैठो मुझसे, गले भी मत लगाना,
मैं ख़ुद से एक वादा करके आई हूँ।
इस सूने घर की दीवारें अब सजने के लायक नहीं हैं,
ये कच्चा मकान कहीं तुम्हारा घर न हो जाए -इस अनहोनी को रोकने आई हूँ।
यूँ नज़रें न मिलाओ मुझसे,
मैं बिछड़ने का इरादा करके आई हूँ।
By Bansari Pritesh

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