।। उद्देश्य पग पखारता ।।
- Hashtag Kalakar
- Aug 4, 2025
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Updated: Aug 6, 2025
By Mukta Sharma Tripathi
विश्राम का समय नहीं।
आराम का समय नहीं।
साहस पथ निहारता।
उद्देश्य पग पखारता।।
देखो, उठो, अब चलो।
श्रम के लोहे में गलो।
नव रूप राह संवारता।
उद्देश्य पग पखारता।।
शूल बड़े कंटीले हैं।
मानो तो रंग रंगीले हैं।
जगमग मग पुकारता।
उद्देश्य पग पखारता।।
व्योम से अग्नि झरे।
पंख जल-जल मरे।
चुनौती दे ललकारता।
उद्देश्य पग पखारता।
श्वास मंद, नेत्र अंध।
भय का बंधा है बंध।
स्वर भेदी, अर्जुन धारता?
उद्देश्य पग पखारता।।
धुँध अस्त-व्यस्त भई।
लो मंजिल दिख गई।
कर्मयोगी ना हारता।
उद्देश्य पग पखारता।।
By Mukta Sharma Tripathi

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