ज़िन्दगी के सौ सवाल
By Saurabh Subhash Chand
ज़िन्दगी के सौ सवाल, किसका जवाब दूँ,
कुछ ख़ुशमिज़ाज़ साँसों का, क्या हिसाब दूँ..
हर दुसरे पल राह में, बैठा है अँधेरा,
हर पल अब कहाँ से, इसे आफ़ताब दूँ..
लगाना चेहरे पे चेहरा, मुझको नहीं आता,
लोगों के लिए, ख़ुद को क्यों, नकली हिजाब दूँ..
पहले ही इसका नाम, बद से भी बदतर है,
कोई बताए ज़रा, और क्या ख़िताब दूँ..
किल्लत है ज़िन्दगी मगर, परवाह नहीं है,
जन्नत नसीब ना सही, जन्नत का ख्वाब दूँ..
पता नहीं, मैं तुझको, क्या दूंगा ऐ ज़िन्दगी,
पर चाहता हूँ, जो भी दूँ, लाजव़ाब दूँ..
By Saurabh Subhash Chand

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