ख़ामख़ा नहीं
By Himani Bhardwaj
ये खलिश जो है वो ख़ामख़ा नहीं
दिल की दबी कोई हसरत तो नहीं
मेरे खयालो में तेरी परछाहिया
की इन सांसो का निशान तेरे बिन कुछ नहीं
ये तेरा अक्स है या मेरी बेखुदी
मेरी बेचैन धड़कनो की कोई साजिश तो नहीं
तन्हाइयो की आहटों में तू बन जाये मेरा जहाँ
तेरी ज़िन्दगी में मेरी मौजूदगी मेरी खुश फेहमी तो नहीं
जागे सोये से अरमान मेरे
खिल उठते हैं नाम से तेरे
के अधूरे हैं तेरे प्यार के बिन
पूरक मेरी चाहत का तेरे बिन कोई और नहीं
By Himani Bhardw

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