होठों पे मुस्कान (सृष्टि से)
By Himani Agarwal
वो झरने का श्वेत शोर,
लाता है होठों पे मुस्कान,
वो पर्वतों पे हवा की सरसराहट,
लाती है होठों पे मुस्कान,
वो जंगल में मोर का शोर,
लाता है होठों पे मुस्कान,
वो पेड़ों पे कोयल की कूक,
लाती है होठों पे मुस्कान,
वो समुद्र में लहरों की गड़गड़ाहट,
लाती है होठों पे मुस्कान,
वो बहती नदियों की कल-कल,
लाती है होठों पे मुस्कान,
वो आकाश में इंद्रधनुषी रंग,
लाते हैं होठों पे मुस्कान,
वो ढलते सूरज की लालिमा,
लाती है होठों पे मुस्कान,
वो प्रकृति की हर छोटी देन,
करती है मन को शांत,
और लाती है होठों पे मुस्कान।।
By Himani Agarwal

Comments