हाल-ए-दिल
By Dr Snehal Gorde
एक वक्त था,जब दिल सपनों में था।
शायद उस मौसम का नाम, इश्क था।।
जब तुम सिर्फ़ हमारे थे,उस जमाने की शामें कुछ और थी।
रूत सुहानी, जिंदगी रूमानी और मुस्कुराने की वजह थी।।
वो रूठना, मनाना खिलखिलाकर हसना हसाना।
हर रोज़ बात करने का,तब था एक नया बहाना ।।
मुलाकातों की तो बात, सबसे अलग थी ।
कुछ झगड़े, कुछ बातचीत, पर यादें सिर्फ हमारी थी।।
इन हसीन यादों के साथ,याद आती है वो आखरी मुलाकात।
आखें नम, बेबस हम,और रुठी हुई पूरी कायनात।।
जी जान से कोशिश करते रहे, तुम्हें अपनाने के लिए।
उस चक्कर में बदनाम हो गए,तुम्हारी गलियों में हमेशा के लिए ।।
जिंदगी के किसी मोड पर ,दोबारा शायद कभी मिलेंगे।
प्यार के लम्हों की रोशनी से, फिरसे जगमगा उठेंगे ।।
गुम हो गए सारे खयालों के दिन, अकेली रह गयी रातें।
आज भी पलकों पे चुपके से, कभी आती है वो सारी बातें।।
जज्बातों से भरे हुए दिल का, विरान हो गया आशियान।
कुछ कहीं, कुछ अनकहीं, अधुरी सी हमारी दास्तान।।
By Dr Snehal Gorde

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