हार नहीं मानूँगा
Updated: Jul 19, 2025
By Kushagra Singh

मैं हार नहीं मानूंगा
कर्तव्य पथ पर चलकर मृत्यु को स्वीकार नहीं मानूंगा
युद्ध से किंचित डरकार लड़कर मैं कृपाण नहीं डालूंगा
मैं हार नहीं मानूंगा
लड़ता लड़ता लड़ता हर बार नहीं हारूंगा इस बार नहीं हारूंगा
मैं हार नहीं मानूंगा
चिंता पीड़ा से भरकर घिरकर
समक्ष प्रस्तुत मैं रहूं
बाधाओ से उभर कर
मै हार नहीं मानूँगा
कर्तव्य पथ पर चलकर सिमट कर
काल को स्वीकार नहीं मानूंगा
मैं हार नहीं मानूंगा
यात्रा के इस मार्ग में मृतकों को देखकर डर कर
कदाचित निर्भय होकर कृपाण नहीं डालूंगा
मैं हार नहीं मानूंगा
ईर्षा या छल से लिपटकर
जल जाऊंगा तिनके सा
चिंगारी से ज्वाला बनकर
मै हार नहीं मानूँगा
जिस दिन अहंकार से लिपट जाऊंगा
भू पर गिरकर सिमट जाऊंगा
हूं चाहे कितने भी उच्च प्रखर पे
यदि गिरूंगा मैं शिखर से
संघर्ष नहीं टालूंगा
अस्त्र नहीं डालूंगा
लड़ता लड़ता लड़ता हर बार नहीं हारूंगा
इस बार नहीं हारूंगा
मैं हार नहीं मानूंगा
By Kushagra Singh

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