हां मैं एक लड़का हूं
Updated: Dec 2, 2022
By Shivali
घर से दूर हूं , पर घर की याद में रो नही सकता हूं
दर्द है तकलीफ है पर मरहम नही लगा सकता हूं,
काफी उलझने है जिंदगी में , जिन्हे मैं सुलझा नहीं सकता हूं
मां को याद करता हूं पर उन्हें बता नही सकता हूं ,
पापा की फिकर है मुझे इसलिए खुद का हाल नही बताता हूं,
जे उलझी हुई जिंदगी छोङ कर वापिस लौटना चाहता हूं
पर मजबूरी और जिम्मेदारियां मेरे सर पे है मैं भाग नही सकता हूं,
हां मैं एक लड़का हूं, जो अपनी परेशानियों को बयान नही कर सकता हूं!
कोई हाल पूछे तो सब सलामत बता दिया करता हूं
सुबह कहीं उठने में देर न हो जाए, अलार्म की पहली रिंग पे उठ जाता हूं,
लोगो के ताने और रिश्तेदारों की बातों का जवाब ढूंढने निकला हूं
घर वाले तो उम्मीद लगाए रखते है की कुछ करेगा
उनकी उम्मीदों पे खरा उतरूंगा क्या बस जेहि सोच कर घबराता रहता हूं,
हां मैं एक लड़का हूं , जो जज्बातों को दफना के रखता हूं!
By Shivali

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