हाँ मै हूँ किन्नर
By Noorussaba Shayan
किन्नर हूँ तो क्या मैं इंसान नही
फिर तुझसा क्यूँ मेरा मान नही
क्या मुझको दर्द का अहसास नही
क्या अपनेपन की मुझको प्यास नहीं
हाँ मैं हूँ किन्नर
अपने आप पर मुझको भी नाज़ है
क्यूँ मेरा वजूद मेरे घर में एक राज़ है
मैं भी इस क़ायनात का हिस्सा हूँ
हक़ीक़त हूँ न ही कोई किस्सा हूँ
हाँ मैं हूँ किन्नर
थे कभी राजघरानों की ज़ीनत
है अब भिखारी सी क्यूँ हालत
है हर खुशी से हमको भी रब्त
है हम में सब सहने का ज़ब्त
हाँ मै हूँ किन्नर
ये नाम है एक हुनर का
नृत्य, संगीत, स्वर का
तेरी दी हुई हर ज़िल्लत उठाते हैं
फिर भी दिल से दुआ ही देते हैं।
By Noorussaba Shayan

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