हसरतें क्या क्या बतलाएँ………
Updated: Sep 21, 2022
By Vishal Chaudhary
दूरियाँ भी तुमसे हैं, और दूरियाँ भी तुम ही हो
तेरे हिज्र में साथ जीने को, लाख ख़्वाब सजाए बैठे हैं
इश्क़ में क्या क्या बतलाएँ, हसरतें अपनी
पानी जो जले वो आग तो, अपने दिल में जलाए बैठे हैं
तुझ पर कुछ यूँ फ़ना हैं कि, काँटें भी गुलाब हैं
चाँद तारों से क्या पूछते हो, हम रोज़ ईद मनाए बैठे हैं
तुझसे मुलाक़ात को, ज़र्रे-ज़र्रे को, ख़ुदा मान रखा है
रूबरू नही मेरे हाल से, हम ग़ैरों को भी गले लगाए बैठे हैं
ज़माने से लाख बचकर, कुछ ख़त भी लिखे हैं
शायद तू इक दिन आएगी, उम्मीद में बाँहें फैलाए बैठे हैं !!
By Vishal Chaudhary

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