हर सम्त
By Umar Khan
हर सम्त हर सू तू है
मेरे दिल का सकूँ तू है,
इसलिए भी रहता हूँ ख़ामोश मैं
मेरी तो सारी गुफ़्तगू तू है,
बरसों से है रात अमावस की
क्या चाँद के रूबरू तू है,
दोस्त पूछ रहें हैं इश्क़ मेरा
इजाज़त हो तो बता दूँ तू है,
नज़र से गुज़री पागल कर गयी
एक शक्ल जैसे हुबहू तू है,
यह लोग तुझे जानते नहीं दोस्त
मोहब्बत का तो वज़ू तू है।
सम्त - Direction
वज़ू - Process before Prayer
By Umar Khan

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