हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
Updated: Jul 16, 2025
By Vijay Dilip Patil
जो कभी कबार होता था वह पल-पल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
जो चुप-चुप के होते थे गुनाह अब सरेआम कत्ल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
जो टल सकता था वह हर हादसा अटल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
रोज एक नया मसला तैयार है और हर रोज पुराना मसला हल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
साफ सुथरा पानी पीते हैं सब और प्रदूषित यहां मगर जल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
हर मसले का हल है गूगल पर रिश्तो की गुत्थी क्यों नहीं सुलझती
न जाने इंसान कहां असफल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
मौका भी डिजिटल है यहां धोखा भी डिजिटल है
जाने कैसा माहौल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
जो हो ना हो असल जिंदगी में वर्चुअल दुनिया में सब कुछ आजकल हो रहा है
हर शख्स यहां डिजिटल हो रहा है
By Vijay Dilip Patil

Comments