हर पल का शुकराना
By Deependra Srivastava
अच्छा है की हम संसार के ठुकराए हुए है
किसी ने गर जो पसंद किया होता
तो हम खुदा तेरे होने से चूक जाते
तुझको जानने से चूक जाते
अब जो तेरा हूँ
तो कौन पराया कौन मेरा है
दो दिख रहे पर चारों ओर एक ही का पहरा है
मेरी असफलताएं संसार की नज़रों मे असफलता बनी तमाम
उम्र रहेगी
मेरे रोग संसार की नज़रो मे पीड़ा का रूप देखते रहेंगे
पर मैंने ही जाना जिसने तेरी रज़ा को स्वीकार किया वो तेरे
आनंद के छाव मे बसर कर रहा होता है
अच्छा है की हमे नसीब दुख हुए
किसी ने गर सुख से वंचित ना किया होता
तो हम खुदा तेरे होने से चूक जाते
तुझको जानने से चूक जाते
अच्छा है की हमे नसीब विरह हुई
किसी ने गर मिलन से वंचित ना किया होता
तो हम खुदा तेरे होने से चूक जाते
तुझको जानने से चूक जाते
अच्छा है की हमे ये मानव जन्म मिला
किसी कारण हम वंचित इस जन्म से होते
तो हम खुदा तेरे होने से चूक जाते
तुझको जानने से चूक जाते है
By Deependra Srivastava

Outstanding