हर घर तिरंगा
By Chandra Kant Mishra
घर तो बस एक सपना है लेकिन ये देश भी अपना है पेट हो भूखा या तन नंगा फिर भी लहराएँगे हर घर तिरंगा महंगाई से त्रस्त बेचारी जनता है राष्ट्र-निर्माण में लगा भ्र्ष्टाचार अभियंता है मेहनतकश करते फांके राजनेता सब चंगा फिर भी लहराएँगे हर घर तिरंगा।
शिक्षित और ज्ञानी बैठे बेकार हैं निकृष्ट मूर्ख चला रहा सरकार है मंदिर मस्ज़िद में ये करवाते दंगा फिर भी लहराएँगे हर घर तिरंगा। मातृभूमि तुझको सौ बार नमन है न्यौछावर तुझ पर तन मन है अपना तो जीवन बस एक मलंगा फिर भी लहराएँगे हर घर तिरंगा।
By Chandra Kant Mishra

Comments