हर घर कृष्ण
By Diksha Dhyani Kala
सुनो,
क्या अभी भी तुम बैठे हो ,
नजरें बिछाए ~आस लगाए,
कि श्री कृष्ण आयेंगे
और कौरवों से द्रौपदी की,
लाज बचाएंगे,
तो जाग जाओ,
ज़रा जाग जाओ ,
कुछ होश में आओ,
ना यह द्वापर युग है ,
ना कोई कृष्णा है यहां,
क्योंकि आज कलयुग का राज है ,
यहां एक नहीं अनेक दुशासन का वास है,
कोई गली नुक्कड़ दिख जाएंगे ,
और आंखों से ही नोच कर खाएंगे ,
लेकिन विश्वास उन पर भी मत करना,
पहने बैठे है जो सज्जनता का झूठा गहना,
यह कुछ ऐसे खेल खेल जाएंगे,
कि दाग़दार तुम्हारे किरदार को कर जाएंगे,
तुम चीखोगे चिल्लाओगे,
अपने हक के लिए गुहार लगाओगे,
इस उम्मीद में शायद,
कि कहीं से कोई तो चमत्कार प्रभु दिखाएंगे ,
और कलयुग में भी ,
सुदर्शन चक्र लेकर कृष्ण स्वयं आ जाएंगे ,
जब अति इतनी हो जाएगी ,
कि कानून से उम्मीद नहीं रह जाएगी,
भगवान का ही नाम हर समय याद आएग,
मत भूलना यह कि ,
ना यह रावण की लंका है ,
सुरक्षित यहां नहीं सीता है ,
त्रेता युग की कल्पना,
अपने आप से किया एक धोखा है ,
सुना है कुछ दिन पहले ,
एक भाई हत्यारा बन गया ,
क्योंकि बहन से की बदसलूकी का ,
उसने कुछ ऐसा बदला लिया,
सर अत्याचारी का धड़ से अलग करके,
सीधा पुलिस चौकी को चल दिया ,
सुना यह भी है कि,
एक पिता ने हथियार का सहारा है लिया ,
खून जब अपराधी का फर्श पर ना पड़ा,
तब तक उस पिता ने अपराधी को न छोड़ा,
कुछ समझे ,
क्या समझे,
जो कलयुग का दौर है चला ,
उसमें यह पिता और भाई ने ,
है कृष्ण का रूप लिया,
जब समाज में डर ही ना होगा,
तो हर घर में दुशासन होगा,
और इस डर को बनाने के लिए,
मत भूलो
मत भूलो कि,
हर घर में एक कृष्ण को जन्म लेना होगा,
हर घर में एक कृष्ण को जन्म लेना ही होगा ।
By Diksha Dhyani Kala

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