हमेशा.....कब तक ?
एक दफ़ा, किसी ने ऐसा छोड़ा हाथ,
कि आँसू ने भी जाने दिया आन्खों का साथ
ऐसी चुबी रूह तक की वो नस,
कि पेट में वो सारी तितलियाँ, अचानक ही मर गयी बस
देह ने जैसे खुद्को लिया था दफ़ना,
घुट घुट दिल जा बैठा एक अन्धेरी गुफ़ा
तब जाकर ये हुआ एहसास,
कि इन सब मौज़ुओं पर क्या होना उदास?
मोहब्बत कभि न थी बेवफ़ाई से कुच्छ खाँस,
ऐतबार के वादें, आखिर हैं ही बस ज़ुबानी अल्फ़ाज़
ज़िन्दगी में हर कोई आता है जाने के लिए,
फूल खिलता ही है, एक दिन मुर्झने के लिए ।
By Nihar Parpia

Comments