top of page

हमसफ़र-ए-हयात

Updated: Dec 5, 2022

By Nidhi Gupta








महफ़िल में हँसने वाले सभी खुशनसीब नही होते

हमसफ़र-ए-हयात भी तो लाज़मी, दिल के करीब नही होते,

रूह में बस कर अश्क-ए-गम का मंज़र बना गये,

हम जैसे भी तो दुनिया में शायद, बदनसीब नही होते|

इतनी इनायत रहमदिल खुदा ‘गर कर देता हम पर

मोहब्बत की दुनिया में हम इतने, गरीब नही होते,

कब्र से उठ कर भी आ जाते उनके दीदार को

‘गर मोहब्बत निभाने में वो इतने, बेतरतीब नही होते|


By Nidhi Gupta






Recent Posts

See All
My Words

By Dr. Anuradha Dambhare चार दीवारी मै बैठे ना जाने क्यों ईन खयालोके परिंदो को पर नहीं छुटते... ये खयाल भी शायद लफ्जो के इंतजार मै और...

 
 
 
धी लोचा सिटी।

By Hemangi Sosa ધ લોચા સિટી. અહીંયા વસેલા ચહેરાઓ આ શહેરને એના સ્વાદથી ઓળખે છે. એમ સમજો કે,  આ શહેરમાં તમને સ્વાદના અલગ - અલગ ચહેરાઓ જોવા...

 
 
 
यादें

By Hemangi Sosa યાદો.    કેદ થયેલી ક્ષણો ધબકારા બની ને તમને બેચેન કર્યા કરે છે. પણ , આ છે શું ????        8. (यादें )  ( कैद किए गए पल...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page