हमसफ़र-ए-हयात
- Hashtag Kalakar
- Nov 23, 2022
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Updated: Dec 5, 2022
By Nidhi Gupta
महफ़िल में हँसने वाले सभी खुशनसीब नही होते
हमसफ़र-ए-हयात भी तो लाज़मी, दिल के करीब नही होते,
रूह में बस कर अश्क-ए-गम का मंज़र बना गये,
हम जैसे भी तो दुनिया में शायद, बदनसीब नही होते|
इतनी इनायत रहमदिल खुदा ‘गर कर देता हम पर
मोहब्बत की दुनिया में हम इतने, गरीब नही होते,
कब्र से उठ कर भी आ जाते उनके दीदार को
‘गर मोहब्बत निभाने में वो इतने, बेतरतीब नही होते|
By Nidhi Gupta

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