हमको चाहिए
By Sunil Kumar Shukla
अब न कोरी धमकियाँ ललकार हमको चाहिए ,
काफ़िरों पर वार का अधिकार हमको चाहिए !
जितने घर उजड़े हैं इनकी हरकते-नापाक से ,
हर घरों की चीख का प्रतिकार हमको चाहिए !!
अब न कोई वार्ता ना बैठकों का दौर हो ,
ढूँढ़ कर इनको निकालो चाहे जहाँ भी ठौर हो !
दो इन्हें ऐसी सज़ा दोज़ख लगे ये ज़िन्दगीं ,
ज़न्नते-हूरों से मिलने का नशा ना और हो !
बदले हर इक सर के अब हज़ार हमको चाहिए !!
खोखली हैं शान्ति संयम की यहाँ बातें अभी ,
मान बैठे हैं हमें कायर इसी कारण सभी !
इनकी भाषा सीखकर उत्तर उसी भाषा में दो ,
फ़न कुचल दो बेरहम बन सर ना उठा पाएं कभी !
अब क्रूर शातिर दोमुँही तलवार हमको चाहिए !!
अब बढ़ो कश्मीर से आगे चलो लाहौर तक ,
आग बरसाओ वहाँ छिपने के अन्तिम ठौर तक !
बन के बेबस ये भिखारी तड़पें सदा दिन-रात यूँ ,
माँगने से भी मिले ना इनको जूँठा कौर तक !
अब तो पापी पाक में हाहाकार हमको चाहिए !
पाक में जयहिन्द की टंकार हमको चाहिए !
हर घरों की चीख का प्रतिकार हमको चाहिए !!
जय हिन्द ! जय भारत !! वन्दे मातरम् !!!
🙏🇮🇳🙏🇮🇳🙏🇮🇳🙏
©सुनील
By Sunil Kumar Shukla

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