हम नौकरी वाले हैं
Updated: Jul 29, 2024
By Karan Bardia
हम नौकरी वाले हैं साहब हमारी खुद से मुलाकात भी रविवार को होती है,
खुद से अकेले में बात सिर्फ़ इतवार को होती है।
अरे हर दिन का क्या हिसाब लगाना है,
हमारी तो जिंदगी का हिसाब भी सिर्फ उस एक छुट्टी के दिन होती है।
वक्त कब निकल जाता है बस यूंही काम करते करते पता ही नहीं चलता,
कब सालों साल गुजर जाते हैं घुट-घुट कर जीते जीते पता ही नहीं चलता,
अरे आप क्या जज़्बात बयान करने की बात करते हो,
यहाँ तो कब हसी से आसु छुपाते- छुपाते हम कुछ महसूस करना ही भूल जाते हैं पता ही नहीं चलता।
काम जी जान से करते हैं पर फल सिर्फ उतना ही मिलता है,
खुद की जिंदगी खराब कर देते हैं पर खुद के लिए वक्त बस चुटकी भर ही मिलता है,
माना ज़िमेदरियां उठाने के लिए, उन्हें निभाने के लिए नौकरी जरूरी है,
पर खुद की इच्छाओं को मार कर सुखों के नाम पर सिर्फ दुख और दर्द ही हाथ लगता है।
नौकरी को ही जिंदगी मान कर रोज़ उसकी दौड़ में निकलते हैं,
घर परिवार सब कुछ भूल कर हम सिर्फ नौकरी की धुन में चलते हैं,
अरे इतनी रग में बस गई है ये नौकरी की दौड़,
की अब तो हमारी खुशियां, हमारी इच्छाएं भी इस्के हिसाब से चलती हैं।
रोज़ सुबह अपना टिफ़िन लेकर चलते हैं,
शाम को घर के खाने की सब्ज़ियों के साथ लौटते हैं,
हर रोज़ उन्हीं रास्तों से गुज़रते हैं,
और अपने साथ दौड़ रहे हैं उन्हीं लोगों से मिलते हैं,
एक रिले रेस हो गई है जिंदगी बस घर और ऑफिस के बीच में,
अरे हम तो अपने बच्चों तक की प्लैनिंग अपनी नौकरी के टाइमलाइन्स के हिसाब से करते हैं।
हद है और लानत है ऐसी जिंदगी पे, क्या फ़ायदा ऐसे जीना का,
न किसी के साथ हो सकते हैं न किसी का साथ दे सकते हैं क्या फ़ायदा ऐसे जिंदा रहने का,
बरबाद हो रहा है वक्त और खतम हो रहे हैं हम इस तरह,
क्या फ़ायदा है ऐसे घुट घुट कर कुछ भी करने का।
आपकी जरूरत सिर्फ तब तक है जब तक आप जरूरी हो,
जिस दिन जरूरत ख़त्म उस दिन मैं कौन और आप कौन हो,
इस तरह डर डर के जीने का क्या मतलब,
क्या आप इतने मजबूर और लचर हो।
माना मैं बहुत बोल रहा हूं पर आखिर में मैं भी नौकरी पेशा ही हूं,
कितना भी कह दूं पर इस दुनिया में रहने की वजह से कुछ भी अलग करने से डरता हूं,
दुनिया के हिसाब से चलो वर्ना पीछे रह जाओगे बस बचपन से ये ही सुनता आ रहा हूं,
कहां ही हिम्मत बचेगी किसी में कुछ करने की,
जब कुछ भी जोखिम लेने से पहले मैं दरा दिया जा रहा हूं।
चलो अब बहुत हुआ मैं भी अब अपनी नौकरी के लिए निकल रहा हूं,
फिर मेरी दौड़ के दोस्तों के मिलने के लिए घर से चल रहा हूं,
वक्त मिलेगा कभी तो और बताऊंगा, की मैं किस दर्द से रोज गुजर रहा हूं।
By Karan Bardia

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