हम दोनों से जुड़े हैं ऐसे
By Niharika Singh Parmar
हम दोनों से जुड़े हैं ऐसे
मन के ये जज़्बात हैं कैसे
खुद में रख लूं या मैं कह दूं
तेरा साथ है फूलों जैसा
रात दिन हैं महके महके
सारा जीवन महका महका
मेरा मन बस भीग रहा है
तुम खुशियों के सावन जैसे
आओ ना तुम छूकर देखो
सच को तुम महसूस तो करलो
हो जाए फिर यकीन तुम्हे तो
मुझको तुम बाहों में भरलो
हाथ थाम लो मांग यूं भरदो
सात जन्म का साथ हो जैसे
By Niharika Singh Parmar

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