हम ताप के उत्पात के साथ हैं
By Chandra Kant Mishra
निष्पक्ष वो रहें जिन्हें सीलन पसंद है हम ताप के उत्पात के साथ हैं। रेंगना उन्हें पसंद कीट के मानिंद हम पंख कटे जटायु के पाँख के साथ हैं। हो रहें विलुप्त वो रिपु के साध्वस से हम महिष्वहान दण्डधर के पाश के साथ हैं।
भागते रहें वो जीवनपर्यन्त सुधा की खोज में हम शूलपाणी महाकाल के हलाहल का साथ हैं। मेरुहीन मांसपिंड मृत के सदृश्य वो हम क्रांतिवीर रक्त के उबाल के साथ हैं। मूक सहते रहें अन्याय और व्यभिचार वो हम संघर्ष के लाल रंग के साथ हैं। रुकना नहीं हमें, झुकना नहीं हमें हम मानवता के सुदृढ़ संकल्प के साथ हैं।
By Chandra Kant Mishra

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