हौसले बुलंद हैं आकांक्षा शर्मा
Updated: Oct 8, 2022
By Aakanksha Sharma
राह-ए-मंज़िल में आज कुछ ख़्वाब बिखर गए,
कुछ दूर चल के रास्ते ही बदल गए |
साथ दिया चंद लम्हों का उम्मीद ने,
फिर कुछ रोज़ में वादे भी मुकर गए |
अजीब सी कैफ़ियत में ज़िन्दगी गुज़र रही है,
यह लम्हे बड़े नाज़ुक से हैं हिम्मत - आजमाइश पे |
आज बेवक़्त बारिश से भीगी हुई शाम में,
अश्क भी बूंदों से मिल, आँखों से फिसल गए |
हताश तो बहुत हुई आज फैसले से मगर,
हौसले अपने इतने भी कमजोर न हुए |
यकीन ख़्वाबों पे क़याम है मेरा,
उसकी नियामत से निराश हम कभी न हुए |
उसके ज़हन में मेरे लिए मोहबत खूब है,
इसी एहसास पे ऐतबार जररूर है |
मुकम्मल हर ख़्वाब हो यूँ होता नही,
हर ज़मीन को आसमान हासिल न हुए |
कुछ शिकवे ज़िंदगी ने सबकी झोली में डाले हैं,
यूँ इनसे हार कर मुसाफिर रहन में आबाद कभी न हुए।
- आकांक्षा शर्मा
By Aakanksha Sharma

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