स्त्रियां
By Dhruwa Shankar Prasad
प्रेम में भोली भाली नार लगती हैं
क्रोध में काली का अवतार लगती हैं
ममता में यशोदा का प्यार लगती हैं
भक्ति में मीरा साकार लगती हैं
वीरता में झांसी वाली रानी का यलगार लगती हैं
सेवा में टेरेसा का इजहार लगती हैं
रोमांस में मधुबाला बार बार लगती हैं ।
ये हैं ऐसी बातें जो सामान्य जन को समझ आती हैं
पर ये सदा कहां ऐसी होती हैं !
दर्द मिले तो आंखें बहती हैं
खुशी में भी आंखें बहती हैं
कुछ कहना हो कुछ कहती हैं
खामोशी में आंखें बोलती हैं
लबों पर मुस्कान रखती हैं
दिल में कसक संभाल रखती हैं
लजा जाए सागर भी दिल में इतने सामान रखती हैं ।
किस रैक में क्या सजा है
किस डिश में क्या इंग्रेडिएंट रखा है
किस आचार में क्या मिला हुआ है
किस इमोजी में क्या छुपा हुआ है...
विस्तृत व्याख्या बस ये कर सकती हैं ।
तन में दिल कोमल रखती हैं
दिल में बात हजार रखती हैं
समझ न पाएँ गर आप इनको
रूठ जाने का जन्मसिद्ध अधिकार रखती हैं ।
रहस्य कितने भी हों इनमें
कुछ बातें अलग हैं इनमें
घर आंगन महका महका रहता है इनसे
समाज में संतुलन बना रहता है इनसे
जीवन जायकेदार बना रहता है इनसे
इसीलिए सभ्य समाज ,उचित स्थान इन्हें दिया करता है
सम्मान इन्हें दिया करता है
सभ्य समाज , प्यार इन्हें दिया करता है
अधिकार इन्हें दिया करता है ।
By Dhruwa Shankar Prasad

Nice poem
👍