स्क्रीन की छाँव में
By Jyotsna Kalkal
रहने लगे हैं अब सब
हर पल स्क्रीन की छाँव में
क्लिक क्लिक की गूँज है
हर शहर और गाँव में
हर चेहरा अब
प्रोफाइल बन गया है
रिश्ते, बधाई या त्यौहार
सब ऑनलाइन ठहर गया है
स्माइल, इमोज़ी में सिमटी हँसी
दिल की बातें अब पोस्ट हुईं सभी
दोस्त ऑनलाइन हैं
आस पास नहीं
रिश्ते हैं बहुत सारे
पर सच्चे एहसास नहीं
ज्ञान के देखो जहाँ
नित नए भंडार भरे
रेमेडी, हैक,उपाय
हर तरफ़ बिखरे
भ्रम लिए अगले पल जीत का
हारते जा रहे हर एक दाँव में
रहने लगे हैं अब सब
हर पल स्क्रीन की छाँव में
By Jyotsna Kalkal

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