सैनिक से भारत
By Akash Singh
आंखों में अश्रु पनपे, है दिल में अंगार लिए
अपना गुस्सा थामे बैठा, सैनिक हर हथियार लिए
औरों को मारते अतांकियों की होती देश में बातें हैं
सैनिक मरते हैं, होती पल की बातें और सब भूल जाते है
ये कैसा कानून के सरहद पर वो शांति फैलाएं
जिससे होती बातें है वो मस्तक तब तक ले जाए
ख़ून कहो क्यों ना खौले जब अपना ही कोई यार मरे
शांति रखने के चक्कर में, हैं सैनिक ही हर बार मरे
भारत मां के लाल है ये, हर एक को ना तड़पाएंगे
इतना तो विश्वास रखो, जाहिल को बात सिखाएंगे
हिंसा और आतंक के आगे, मरने को तैयार खड़े
एक भी हो; जो अच्छा उसमे, खुद ही साथ में लाएंगे
क्यों इनको फिर ये कहना, आदेश का इंतजार करो
जब वो तुम पे वार करे तब ही तुम भी वार करो
ये क्या बात हुईं के पहले तुम ही गोली खाओगे
मारने वालों से पहले तुम गांधी सा बतियाओगे
ढोंग एक ये भी है के हम कैद करें उनको पालें
क्यों ऐसा? आतंकी को हम वहीं ढेर ना कर डालें
उसे यहां बैठा कर के क्या बिरयानी खीलवाएंगे
जन्नत को तो निकले है तो वहीं शैर करवाएंगे
हर एक शेर वहां पे जो, मतवाला बन उस ओर चला
इस धरती का सम्मान लिए, अपने सारे सुख छोड़ चला
वही एक जो सच्चा है, हम; उसको भी सिखलाते हैं
सैनिक सरहद पर मारता है, उसी से सवाल पूछे जाते हैं
फिर भी देखो, घर घर से; कितने भगत सिंह जन्मे आए
इतनी बातें सरहद की, वो कभी नहीं के घबराएं
जिल्लत है मंजूर उन्हें, ना चाहें; धरती की इज्जत खोना
सब कुछ है मंजूर उन्हें, ना मंजूर है भारत के टुकड़े होना
ऐसे वीर योद्धाओं को सत नमन है ये अकाश किए
जल थल दे ताकत उनको, छबी सूरज सा प्रकाश लिए
शौर्य लिखूं इनका नतमस्तक बातें इनकी बतलाऊं
जितनी बार लिखूं “सैनिक” मैं भारत की गाथा गाऊं।
By Akash Singh

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