सूरज सा इश्क़
By Akansha Ashok
झूठे हैं वो लोग जो कहते हैं चाँद सा इश्क़ करो,
मैं कहती हूँ तुम 'सूरज' सा इश्क़ करो।
कहते हैं चाँद पर तो दाग है, फिर भी लोग अपने हमसफ़र को 'चाँद सा' बताते हैं।
मैं तुम्हें अपना सूरज मान लूँ क्या?
ख़ैर, किसी से तुलना तो होगी नहीं, पर तुम्हें अपना 'सूरज' बता दूँ क्या?
जब पूरी दुनिया चाँद की ख़ूबसूरती की बात करती है,
मैं उसे अपना 'सूरज' मानती हूँ।
तपता है, जलता है,
हर रोज़ वही बेबस मिलता है,
थकता ही नहीं, जैसे प्यार कभी जाता ही नहीं।
चाँद की तरह एक रोज़ ग़ायब नहीं होता,
और कहा जाता है—
जिस दिन सूरज ग़ायब हो जाए , उस दिन सब ग़ायब हो जाता है।
By Akansha Ashok

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