सूनो ना...
By Pranali Deshmukh
रूह में मिलावट नहीं तो ज़िस्म में मिलावट क्यों है ?
चेहरा आदमी का तो औरत सी लिखावट क्यों है ?
स्मगलर देशद्रोही आतंकी जैसे तो नहीं काम इनके
ख़ुशीसे शगुन देकर भी मन में घृणा की आहट क्यों है ?
ठुकराया अपनोंने समाजने ...
इक तुम ही तो थे मेरी तरह मेरे जैसे हमजिंसी...
मुझे समझनेवाले और समझानेवाले.
थोडासा दर्द बाँटकर हमदर्द बने तो दुनिया हँसने लगी .
चलो जगहसाई ही सही किसीको हँसाने में कामयाब तो हुए . ये भी कुछ कम नहीं ...
शुक्र है हम लोगोके बिच कभी डोमेस्टिक व्हॉयलंस नहीं होता . समान अधिकार समान विचारधारा ... और बहोत कुछ समानही सही ...
नहीं रखता कोई व्रत लम्बी उम्र के लिए .
नहीं होता कोई दोनोमेसे एक परमेश्वर .
सबसे अलग होना किसे अच्छा नहीं लगता मगर कुदरत ने हमकोही अलग बनाकर किस पाप की सजा दी ?
एक सवाल मन में हैं ....
कोक में बेटियोंको मार देनेवाले सबसे पापी होते है या फिर हमको जन्म देनेवाले ?
By Pranali Deshmukh

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