सुबह -सुबह !
By Nisha Dudi
जब पढ़ती हूँ अख़बार ,
ओर देखती हूं उसमें आया है !
आज फिर एक नया समाचार
कि हुआ है एक ओर जगह,
एक ओर नारी का बलात्कार
तो मेरी आत्मा मुझे लेती है पुकार
ओर पूछती है यही
क्या नारी होना है अपराध !
क्या नारी होने है अर्थ है,
कि एक नारी का होगा हर जगह अपमान ,
हम कब तक मानते रहे गई उसको एक शरीर मात्र ,
एक दिल बहलाने की वस्तु मात्र !
कब तक आखिर करते रहेंगे ,
उसकी आत्म का क़त्ल ,
कब तक करते रहे गई उसकी सोच का बहिष्कार !!
आखिर कब रुकेंगे ,
ये उसके शरीर ओर उसकी आत्म पे रोज- रोज हो रहे वार !!
आख़िर मैं पूछती हु ,
अखंड भारत के नागरिकों से की कब रुकेंगे ये बलात्कार !!
कब रुकेंगे ये बलात्कार ,
या शायद रुकेंगे ही नहीं,
हमारी आत्माओं पे हो रहे ये वार
बोलो मेरे देश वासियों
क्योंकि मेरी आत्मा यही पुकार रही है
बार - बार!!
By Nisha Dudi

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