सुनो सखी
By Suman Rai
हृदय क़े संताप क़ो, अपने आप में मत रखना सखी,
उचित,अनुचित के विकल्प खुद से ही मत चुनना सखी ।
जो भी उलझन उलझाए, खुलकर मुझसे कहना सखी,
ना कोई शर्त है , ना ही है बाध्यता,
मित्रता को यूँ ही सरल रखना सखी ।
तुम खुद के स्वभाव में रह , सब सहना सखी,
सुलभ प्रवाह है निहित , पथ प्रशस्त करना सखी।
नादानियाँ कर , मजबूरियों की फ़िकर ना करना सखी,
समय का प्रवाह सब संयमित करेगा,
इसके मूल अर्थ को समझना सखी
हर राह हर मोड़ मैं साथ हूँ खड़ी,
अपनी ही किसी जंग में ना हारना सखी
By Suman Rai

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