सुना के हमने उसे
By Keyur Joshi
सुना के हमने उसे रिझाए रखा है,
फुरकत का मौसम उसीने बनाए रखा है
जिस एक दिए के सहारे काटते हो रातें तुम,
वो एक चराग़ हम ही ने जलाए रखा है
बैठा है सय्याद इख़्तियार-ए-परवाज़ की शह में,
और परिंदे ने पिंजरे में हंगामा मचाए रखा है
अब तो बेसाख़्ता बयाँ हो जाती है हिकायतें मेरी,
कुछ इस तरह उसने मुझे फँसाए रखा है
एक चिड़िया आती है रोज़ लिए उम्मीदों के साए,
हमने एक दरख़्त अपने ख़ातिर बचाए रखा है
By Keyur Joshi

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