सुकून की चाय
By Ankita Pradeep
आज बड़े दिनों बाद फुरसत के कुछ पल निकले हैं
चाय की चुस्की लेते हुए पुराने दोस्तों को याद किए हैं
आखें चुराने लगे थे जिनसे उनसे मिलने का दिल करने लगा है
जिनसे सिर्फ ही हाय हेलो ही होती थी
उनसे भी गले लगने को दिल हुआ है
दोस्ती अच्छी या बुरी नही थी कभी
दोस्त तो दोस्त यही खबर थी तब भी और आज भी
आज इत्मीनान से बैठे तो खुद के लिए दो पल निकाले
हर चुस्की पर मुस्कुराए और हर घूंट पर सुकून की सांस ली
ऐसा लगा जैसे बचपन में स्कूल की फनी योगा क्लासेज में भी घूम आए
आज इत्मीनान से बैठे तो खुद के लिए दो पल निकाले
हर चाय की चुस्की पर मुस्कुराए और हर घूंट पर सुकून की सांस ली
फिर इसी चाय ने बिस्किट्स की और बिस्किट्स ने घर की
और घर ने दोस्तों संग मोमोज की याद दिलाई
अपनी इसी मुस्कान को जो बाहर ढूंढ रहे थे
आज इस शाम ने सारे यादों और खुशियों पर लगे तालो की चाभी भी खोज निकाली,
रिश्ते यह जो नए और अपने भी बने
ओल्ड तो गोल्ड था ही, नए भी गोल्ड बने
वो पुराने दोस्त और यह नए मेम्स
वो चेन-चेन और यह कैंडी क्रश वाले एंडलेस गेम्स
ओल्ड डंब-शेराद्स और यह नए टैबू लाइक गेम्स
सब अपग्रेड हो गए
सबके सब अपग्रेड हो गए,
और फ्रेंड्स भी क्रेजी से मोर क्रेजी हो गए
अब हर दिन ऐसी शाम बिताएंगे
थोड़ा वक्त निकाल सुकून भरी शाम बिताएंगे
अब हर दिन ऐसी ही शाम बिताएंगे,
थोड़ा सा वक्त निकाल सुकून भरी शाम बिताएंगे
पुराने दोस्तों को मेसेजेस पर पोक
और नए के साथ चाय वाली मीठी मीठी यादें बनाएंगे।
By Ankita Pradeep

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