सिर्फ तुमसे
By TanuShree Patwa
सुनो, कुछ कहना है तुमसे,
शायद कुछ जताना है तुमसे,
इजहार करना है तुमसे,
समझ नहीं आ रहा कैसे कहूँ तुमसे,
इकरार करू या छुपालू तुमसे,
बहुत से एहसास जुड़ने लगे है तुमसे ,
एक प्यारा सा रिश्ता बनने लगा है तुमसे,
बयान कैसे करू अपना हाल-ए-दिल तुमसे,
मेरी दिन-रात अब सब तुमसे,
मेरी सुबह-शाम के दायरे तुमसे,
ये जिन्दगी शुरू तुमसे,
और ख़त्म भी तुमसे,
हाँ, मेरी पहेली और आखरी मोहब्बत तुमसे।
By TanuShree Patwa

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