सितारा (सुशांत सिंह राजपूत को समर्पित)
Updated: Oct 10, 2022
By Nilakshi Raul
आज एक सितारा आख़िर
आसमान का तार बन गया
जिसने चाँद पर ज़मीन ली थीं
वो उस चाँद के और करीब होगया
सोचा ना था
तुम इतने जल्दी अलविदा कहोगे
कोई नाता तो था नहीं
पर कोई अपना ही चला गया
पता ही ना चला
तुम्हारी कहानी ने मुझे कब प्रेरीत किया
तुम्हारी सपनो की सूजी ने
मुझे भी ख़्वाब दिखाये
सोचा था
तुम्हारे जैसे ही एक कलाकार बनूँगी
सोचा था
शायद कभी मुलाक़ात तो होगी
तुम्हारे सारे सिनेमा तो ना देखें
पर जो देखें उसमें
तुम एक उमँड़ा अभिनेता लगे
कभी तुम्हारे साक्षात्कार ना देखें
पर राब्ता जैसी फिल्म में चार बार देखीं
बस क्यूकि उसमें तुम अच्छे लगे
काश ये बातें तुम्हे तब कहती
शायद आज अंजाम कुछ अलग होते
उम्मीद तो येही है
यह सब समाचार झूठे होते
या तुम एक नाटक कर रहें होतें
तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारी वाह वाही तो बहोत हुई
इधर उधर कीचड़ भी उछले
पर तुम्हारा जाना बहोत से सबक दे गया
भारी मन के साथ
में येह सब लिख तो दिया
पर इसे सही शब्दों में अंत करने का
वो जिगरा ना था
By Nilakshi Raul

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