साहिब-ए-किरदार
Updated: Jul 18, 2025
By Kshitij Kawatra

कहने को कहते है कहने वाले
अक्सर चुप रहते हैं सहने वाले
ए'तिबार-ए-हस्ती-ए-बे-ए'तिबार
मुर्दा वो धारे में बहने वाले
मौज-ए-तूफ़ाँ 'उर्फ़-ए-'आम ज़िंदगी
कहो कैसे टिक पाएँगे ढहने वाले
शजर-ए-साया-दार वो नहीं
जो शजर है सूखे टहने वाले
साहिब-ए-किरदार ओ नेकी-परस्त
दुनिया-ए-दनी से ना बहलने वाले
By Kshitij Kawatra

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