सहराओं से पानी
By Umar Khan
सहराओं से पानी लाकर दरिया बनता है
वो जो भी बनाए, अनोखा बनाता है,
ख़ुर्शीद के ज़वाल पे उसे ऐतराज़ है
वो दिया जलाकर कहकशा बनाता है,
रोज़ वो लड़की दिल के टुकड़े करती है
रोज़ वो लड़का उसका पुर्ज़ा बनाता है,
रात ख़्वाब में मैंने उसे देखा था
सुबह तस्वीर उसकी कोई दूसरा बनाता है,
घरेलू तशद्दुद क्यूँ सहती हो ऐ औरत
तुम्हारा सहना ही इसे मसला बनाता है,
माँ बाप को कमज़ोर बुढ़ापा नहीं बनाता
उन्हें कमज़ोर औलाद का रवैय्या बनाता है।
ख़ुर्शीद - Sun
कहकशा - Galaxy
घरेलू तशद्दुद - Domestic Violence
By Umar Khan

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