सहनशील होती हैं स्त्रियाँ
Updated: Oct 4, 2024
By Gautam Anand
डोल जाती है पृथ्वी भी
खारा हो जाता है गंगाजल भी
परन्तु ये स्त्रियाँ
जाने क्या समझती हैं स्वयं को
इतनी स्थिरता इतनी सहनशीलता
कहाँ से लाती हैं ये
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी
यूँ अडिग रहना
ना बोली में खारापन
ना व्यवहार में लड़खड़ाहट
कितना कुछ सह जाती है स्त्रियाँ
मायके को मिलती गालियाँ
सास के नुकीले उलाहने
फटेहाल भेज दिया है कंगालों ने
जेठानियों के तंज़ तीखे
माँ से तुमने यही संस्कार सीखे
ननदों के चुभते दिल में व्यंग्य
ठीक करो ये रंग ढंग
अम्मा की दुलारी
फूलों की क्यारी
चौका चूल्हा पे दिन भर वारी
सहनशील होती हैं स्त्रियाँ
सह जाती हैं सबकुछ
नई नवेली दुल्हन को
सौंप के घर का सारा जिम्मा
निश्चिंत हो जाती है बूढ़ी सास
कितना ख़ुश होती है ननदें
सखी सहेली जैसी भाभी को पाकर
कितना कुछ सह जाती हैं
बूढ़ी सास, युवा होती ननद
पूरा घर बूढ़े बुजुर्ग
झूठे मुकदमे में घर से थाने
थाने से कोर्ट, कोर्ट से जेल
धूमिल होती आशा
बिखरता आत्मसम्मान
माथे पर कलंक
बर्बाद होता परिवार
बहुत सहनशील होती हैं स्त्रियाँ
बूढ़ी सास, युवा ननद, जेठानियाँ नई नवेली बहु
सब स्त्रियाँ ही होती हैं
कोई पुरुष नहीं होता
By Gautam Anand

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