सर्द सितारा
By Sachin Madhukar Gote
कतल हुई है रात मेरी..
और नींद का बटवारा
धंडकनो की बंद ताविज..
ना आयत ना कोई इशारा..
सर्द शाम सावन कि शामिल..
मेरे गुनाह ए तकदीर में..
है ख़ामोश कल की आंधी..
और कहीं तो दिल आवारा.
एक जबां है, वो भी बंद
कोई आफताब ए आंसू नहीं
कह भी दे निगाह जिसको..
फकत रोशनी सा सर्द सितारा..
By Sachin Madhukar Gote

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